अल्ट्रासाउंड जांच बढ़ा रहा गरीब महिलाओं का दर्द

दान में मिली अल्ट्रासाउंड मशीन तो चले गए रेडियोलाजिस्ट निजी पैथोलाजी पर जेब कटवा रही गरीब प्रसूताएं व तीमारदार

JagranMon, 20 Sep 2021 10:40 PM (IST)
अल्ट्रासाउंड जांच बढ़ा रहा गरीब महिलाओं का दर्द

बलरामपुर: महिला अस्पताल की हालत सुधारने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी दौरा कर सुविधाओं की हकीकत परख रहे हैं, लेकिन उन्हें भी बंद अल्ट्रासाउंड देख तड़प रहीं महिलाओं की पीड़ा नहीं दिखती है। यहां प्रतिदिन 200 से 300 महिलाएं इलाज कराने आती हैं।

इनमें 25 से 30 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड लिखा जाता है, लेकिन जब वह जांच कराने पहुंचती हैं तो पता चलता है कि बाहर कराना पड़ेगा। ऐसे में, एक रुपये में इलाज कराने आए तीमारदारों को 500 रुपये सिर्फ अल्ट्रासाउंड पर ही खर्च करने पड़ रहे हैं। साथ ही भागदौड़ अलग करनी पड़ती है। इससे गरीब गर्भवती व प्रसूताओं का दर्द और बढ़ जाता है।

नहीं होती जांच:

निजी पैथोलाजी संचालकों का रसूख कहें या फिर साजिश। कारण कुछ भी हो, महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच बंद है। छह माह पहले पूर्वांचल विकास बोर्ड के अध्यक्ष साकेत मिश्र ने मशीन दान की। जून में जांच शुरू हुई, लेकिन जुलाई में रेडियोलाजिस्ट डा. एके यादव का तबादला हो गया तब से किसी की तैनाती हुई न ही जांच शुरू हो सकी।

अस्पताल में हो अल्ट्रासाउंड तो पैथोलाजी पर न लगे भीड़:

महिला अस्पताल, रोडवेज बस स्टाप के पास अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर सुबह से ही महिलाओं की कतार लग जाती है जो पूरे दिन लगी रहती है। नगर के तुलसीपार्क निवासिनी हेमा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड के लिए 500 रुपये देने पड़े। रिपोर्ट भी काफी देर से मिली। तुलसीपुर की संजना सोनी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड जल्दी करने व उसकी रिपोर्ट तुरंत देने के लिए महंगा शुल्क लेते हैं।

वहीं, सोनार की सरोज ने बताया कि जब तक जांच रिपोर्ट मिली तब तक डाक्टर चले जाते हैं। श्रावस्ती के कटरा की लक्ष्मी का कहना है कि यदि अस्पताल में नियमित अल्ट्रासाउंड होने लगे तो निजी केंद्रों पर भीड़ कम हो जाए।

बस पत्र लिखने तक हुआ प्रयास:

सीएमएस डा. विनीता राय का कहना है कि रेडियोलाजिस्ट आने के बाद ही अल्ट्रासाउंड जांच शुरू हो पाएगी। तैनाती के लिए डीएम व सीएमओ समेत शासन को पत्र लिखा है। अब तक तैनाती नहीं की गई है।

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