153 स्कूलों का भार, विभाग में बाबू न लेखाकार

संबद्ध सहायक संभाल रहे जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा के वित्त एवं लेखाधिकारी को अतिरिक्त प्रभार

JagranWed, 01 Dec 2021 10:11 PM (IST)
153 स्कूलों का भार, विभाग में बाबू न लेखाकार

बलरामपुर: जिले में माध्यमिक शिक्षा का जिम्मा संभालने वाले विभाग को उधारी के कर्मचारियों का सहारा है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में आशुलिपिक, लेखाकार व कनिष्ठ सहायक के पद वर्षो से रिक्त हैं। ऐसे में, यूपी बोर्ड परीक्षा, शिक्षकों के वेतन, विद्यालयों की मान्यता, कोचिंग पंजीकरण संबंधी अन्य महत्वपूर्ण कार्य राजकीय विद्यालयों के कर्मियों से लिए जा रहे हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात वित्त एवं लेखाधिकारी को जिविनि कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। कर्मचारियों की कमी दूर न होने से विभागीय कार्यो की गोपनीयता प्रभावित होने की आशंका रहती है। बावजूद इसके आला अधिकारी कमी को दूर करने की प्रति संजीदा नहीं हैं।

-जिले में 153 माध्यमिक विद्यालयों का नियंत्रण जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से होता है। इसमें 18 राजकीय हाईस्कूल, चार राजकीय इंटर कालेज, 19 सहायता प्राप्त (पांच अल्पसंख्यक), संस्कृत विद्यालय तीन व मान्यता प्राप्त वित्तविहीन 109 विद्यालय शामिल हैं। 24 अप्रैल से शुरू हो रही यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए जिले में 63 केंद्र बनाए गए हैं।

ऐसे में, केंद्र बने विद्यालयों का निरीक्षण, परीक्षार्थियों का लेखाजोखा समेत अन्य महत्वपूर्ण चुनौतियां विभाग के सामने हैं। जिविनि कार्यालय में मृतक आश्रित पर समायोजित आशुलिपिक अरविद यादव से कनिष्ठ सहायक का कार्य लिया जा रहा है। बलरामपुर बालिका इंटर कालेज के कनिष्ठ सहायक राजबली एवं राजकीय इंटर कालेज दारीचौरा के कनिष्ठ सहायक परमित श्रीवास्तव कार्यालय से संबद्ध हैं। राजकीय इंका इटई रामपुर के वरिष्ठ सहायक प्रदीप पांडेय यहां संबद्ध हैं। जो बोर्ड परीक्षा, कोचिंग संचालन, प्रतियोगी परीक्षाओं समेत कई महत्वपूर्ण पटल देख रहे हैं। गोंडा स्थानांतरण के बाद भी जिले का मोह नहीं छूटा। इटईरामपुर में स्थानांतरण कराकर जिविनि कार्यालय में संबद्धता ले ली। लेखाकार का पद रिक्त है।

कर्मचारियों की स्थिति:

सृजित पदों के सापेक्ष तैनाती शून्य है।

आशुलिपिक -एक

-कनिष्ठ सहायक -एक

-लेखाकार -दो

-चालक -एक

-दफ्तरी -एक शासन को भेजेंगे पत्र:

-जिला विद्यालय निरीक्षक गोविंद राम का कहना है कि कर्मचारियों की कमी के बारे में शासन को पुन: पत्र लिखा जाएगा। यूपी बोर्ड परीक्षा के कुशल संचालन के लिए योग्य लोगों को ही जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

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