शादी अनुदान में फर्जीवाड़ा करने वालों को बचाने की कोशिश

जागरण संवाददाता, बांसडीहरोड (बलिया) : एक जांच हो गई अब दूसरी जांच शुरू, हाल दुबहड़ ब्लाक के शादी अनुदान में फर्जीवाड़े के मामले की है जहां सब कुछ स्पष्ट होने के बावजूद जिम्मेदार अब जांच -जांच खेलने में जुटे हैं।

आलम यह है कि धीरे-धीरे मामले के साक्ष्य गायब हो रहे हैं या सीधे तौर पर कहा जाए तो उन्हें गायब करने का मौका दिया जा रहा है। चूंकि सारा खेल खेलने वालों ने मुखौटा ओढ़ रखा है इसलिए विभागीय जिम्मेदार भी अब उनकी पहचान गोपनीय रखने के लिए प्रयासरत है। मामले में एक बार सक्षम अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट दे दी है। लेकिन उस जांच को भी एक अन्य जांच की आवश्यकता है क्योंकि शायद इस जांच में इस पूरे प्रकरण के जिम्मेदारों को क्लीनचिट मिलने में कुछ मुश्किल आ रही है। कुछ ऐसे ही जांच के खेल में पूरे मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है।

-यह था पूरा मामला

दुबहड़ ब्लाक से वित्तीय वर्ष 2018-19 में बड़े पैमाने पर शादी अनुदान के लिए अपात्रों को पात्र बनाकर भुगतान की संस्तुति कर दी गई थी। जिसमें विवाहित से लेकर नाबालिग को पात्र बनाने के साथ कई तरह की तकनीकी अनियमितताओं को अंजाम दिया गया था। जिसके बाद मामले में शिकायत होने पर सीडीओ द्वारा इसकी जांच के आदेश दिए गए और ब्लाक के सभी शादी अनुदान के भुगतान रोक दिए गए। लेकिन मामले में मुख्य जिम्मेदारों को जांच के नाम पर कहीं न कहीं बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

-डोंगल आपरेट कर रचा गया सारा खेल

सिस्टम के अनुसार जब भी कोई बीडीओ ब्लॉक पर तैनात होता है तो एनआईसी द्वारा उसके नाम का डोंगल बनाया जाता है। जिसके बाद उस डोंगल से सम्बंधित विभागों को मिलने वाले पत्र व आवेदन पूर्णत: उसी अधिकारी के माने जाते है और उसकी सत्यता की जिम्मेदारी भी उसी की होती है। इसी डोंगल के खेल में शादी अनुदान के फर्जीवाड़े की कहानी छुपी हुई है। जुलाई 2018 में तत्कालीन बीडीओ राजेश राय का जनपद से बाहर स्थानांतरण हो गया। जिसके बाद उक्त डोंगल को आपरेट करने वाले पटल सहायक ने अपनी मनमर्जी से बिना किसी जांच, नियम व निर्देश की परवाह करते हुए बड़ी मात्रा में शादी अनुदान के अपात्र पात्रों को डोंगल के रास्ते से भुगतान के लिए समाज कल्याण के दफ्तर पहुंचा दिया। मामला खुलने ओर भले ही इस अपात्रों के रेले का भुगतान रोक दिया गया लेकिन यह मामला सिर्फ एक बानगी भर है। इसी तरह डोंगल के रास्ते अन्य लाभार्थीपरक योजनाओं में जाने कितने अपात्र ट्रेजरी में भुगतान के लिए पहुंच चुके है। जबकि जिम्मेदार अभी तक जांच जांच ही खेलने में लगे है।

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