महिलाओं को सिखाया स्वावलंबन, खुद फहराया जीत का परचम

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JagranSun, 16 May 2021 06:17 PM (IST)
महिलाओं को सिखाया स्वावलंबन, खुद फहराया जीत का परचम

संग्राम सिंह, बलिया

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कहते हैं जो दूसरों को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, उनकी तरक्की खुद-ब-खुद हो जाती है। कुछ ऐसा ही परिलक्षित हो रहा है राष्ट्रीय ग्रामीण अजीविका मिशन के तहत गठित गांवों में स्वयं सहायता समूह चला रहीं 30 महिलाओं पर। ये महिलाएं बीते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में डंका बजा चुकी हैं। कोई ग्राम प्रधान तो कोई जिला अथवा क्षेत्र पंचायत सदस्य की गद्दी पर बैठकर इस बार महिला व पुरुषों का नेतृत्व करेंगी। बीते सालों में इन महिलाओं ने समूह के जरिये दूसरों को आत्मनिर्भर बनाया। समूह की करीब 47 महिलाओं ने इस बार विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ा था, जीत भले ही 17 महिला प्रत्याशियों के हिस्से नहीं आई लेकिन वे अपने काम की बदौलत ही दूसरे अथवा तीसरे स्थान पर बनी रहीं। यहां पर उन्हें जिताने के लिए महिलाओं के वोटों ने ज्यादा हिस्सेदारी की है। उनके समर्थन में इन महिलाओं के पुरुष सदस्य भी सामने आ गए। इसके चलते अब वह दूसरी महिलाओं की आवाज बनेंगी। केस 1 : मां काली स्वयं सहायता समूह धरवार की अध्यक्ष रानी देवी इस बार क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव जीती हैं। इंटर तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद शादी के बाद ससुराल में वह कुछ नया करना चाहती थीं। 2016 में समूह की महिलाओं के साथ जुड़ गईं। पिछले वर्ष कोरोना काल में मास्क बनाकर प्रदर्शनी के माध्यम बिक्री किया। अभी वह सिलाई के साथ मशरूम उगाने में जुटी हुई हैं। आचार बना कर दूसरी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में जुटी रहीं। केस 2 : ग्राम पंचायत बघांव की प्रधान बनीं रेनू देवी भी सालों से समूह बघांव से जुड़ी हुई हैं। वह अध्यक्ष हैं। आठवीं तक पढ़ाई पूरी करने वाली रेनू कहती हैं कि गांव की सरकार महिलाओं के बल पर बनी हैं, इसमें महिलाओं के स्वावलंबी बनाने पर विशेष ध्यान रहेगा। सक्करपुरा प्रधान पूनम साक्षर हैं। आत्मनिर्भर महिला स्वयं सहायता समूह की कोषाध्यक्ष हैं। इस वर्ष प्रधान बनी हैं। नंबर गेम

समूह की इतनी महिलाएं जीतीं

13 : ग्राम प्रधान

12 : क्षेत्र पंचायत सदस्य

05 : जिला पंचायत सदस्य यह बेहद अच्छा परिणाम है। समूह के जरिये महिलाएं सालों से दूसरी महिलाओं को स्वावलंबन की राह दिखा रही हैं। इसके जरिये उन्हें ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत में नेतृत्व करने का मौका जनता ने दिया है। इसे बाकी लोगों को नजीर के रुप में देखना चाहिए। --- देवनंदन दुबे, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण

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