आत्मबोध से सार्थक होता है मनुष्य का जीवन

आत्मबोध से सार्थक होता है मनुष्य का जीवन

मनुष्य को यदि आत्मबोध हो जाए तो इससे बड़ी कोई और ब

JagranThu, 25 Feb 2021 06:09 PM (IST)

जागरण संवाददाता, बेरुआरबारी (बलिया) : मनुष्य को यदि आत्मबोध हो जाए, तो इससे बड़ी कोई और बात नहीं हो सकती। उपनिषद भी इसी बात पर बल देते हैं। आत्मबोध होते ही मनुष्य का जीवन रूपांतरित हो जाता है। स्वयं को समझने की शक्ति उसके जीवन को सार्थक बना देती है। यही आत्मबोध जब रत्नाकर को हुआ, तब वे महर्षि वाल्मीकि बन गए।

यह बातें क्षेत्र के गांधी महाविद्यालय मिड्ढा में आयोजित पुरातन छात्र समागम, क्रीड़ा सम्मान व डिजिटल उत्प्रेरक समारोह को संबोधित करते हुए जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया की कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय ने कहीं। कुलपति ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्पो‌र्ट्स के क्षेत्र में यहां के बच्चों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पद्मश्री डॉ. जगदीश शुक्ल के सपनों को साकार करने की जिम्मेदारी आप सभी छात्रों व अध्यापकों पर है। विशिष्ट अतिथि गुलाब देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया की पूर्व प्राचार्य डॉ. विभा मालवीय ने भी विचार रखे। डा. फूलबदन सिंह, डा.दयालानंद राय, प्राचार्य डा.ओमप्रकाश पांडेय, डा.रवि भूषण पांडेय आदि ने संबोधित किया। अंतर महाविद्यलयीय खेलकूद प्रतियोगिता में विजेता 21 छात्र छात्राओं को कुलपति ने पुरस्कृत किया। महाविद्यालय की छात्र छात्राओं ने 3 स्वर्ण, 10 रजत व 8 कांस्य पदक जीते। शुभारंभ मुख्य अतिथि ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सुधीर मिश्र, अंशु सिंह, डा.शकुंतला श्रीवास्तव, डा.मीरा पांडेय, डा.अभिषेक सिंह आदि मौजूद थे। अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य डा.राम गणेश उपाध्याय व संचालन डा.तृप्ति तिवारी ने किया। आभार व्यक्त प्रबंधक श्रीराम शुक्ल ने किया।

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