सीएचसी को बना दिया अस्थाई जेल, व्यवस्था फेल

कोरोना की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए जनपद के चार

JagranWed, 04 Aug 2021 03:51 PM (IST)
सीएचसी को बना दिया अस्थाई जेल, व्यवस्था फेल

जागरण संवाददाता, सुखपुरा (बलिया) : कोरोना की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए जनपद के चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सोनबरसा, सीयर, रेवती व खेजुरी पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रशासन द्वारा मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं जिला प्रशासन 50 हजार की आबादी के बीच सुखपुरा में नवनिर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अस्थाई जेल बनाकर लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं से मजाक कर रहा है। जैसे-तैसे आठ वर्षों के बाद यह स्वास्थ्य केंद्र बनकर तैयार तो हुआ लेकिन इसके शुरू होने के पहले ही जिला प्रशासन ने अस्थाई जेल में तब्दील कर दिया। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में भी क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा उपलब्ध नहीं मिल पाई थी। अब जब तीसरी लहर के आने की आशंका है, इसमें भी लगता है कि लोग स्वास्थ्य सुविधा से वंचित रहेंगे। कुछ महीनों के लिए स्थापित अस्थाई जेल को लगभग डेढ़ वर्ष होने को है। कब तक इस स्वास्थ्य केंद्र को अस्थाई जेल से मुक्ति मिलेगी यह कोई जिम्मेदार बताने को तैयार नहीं है। इसको लेकर लोगों में शासन प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

वर्जन

-जनपद के प्रभारी मंत्री अनिल राजभर को इस संबंध में एक पत्रक भी दिया गया है, जिसमें स्वास्थ्य केंद्र को शीघ्र अस्थाई जेल से मुक्त करने और स्वास्थ्य सुविधा बहाल करने की मांग की गई है। यदि इस पर तत्काल कोई निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचेगा।

-अभिमन्यु चौहान, ग्राम प्रधान -सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अस्थाई जेल में तब्दील किया जाना क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय है। मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल सहित प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का ध्यान आकृष्ट किया गया है।

-विजय शंकर सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य -स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत की परिकल्पना कैसे साकार होगी जब लोगों को मिलने वाले स्वास्थ्य सुविधाओं पर ग्रहण लग जाएगा। सरकार को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को लेकर गंभीर होना चाहिए।

-सुभाष, समाजसेवी काफी प्रयास के बाद यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना तो हुई लेकिन इसका लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है। जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते बड़े पैमाने पर आबादी प्रभावित हो रही है।

-श्याम बहादुर सिंह, समाजसेवी।

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