प्लेटफार्म से ट्रैक तक फोर्स, रोके गए किसान, दौड़ती रहीं ट्रेनें

जागरण संवाददाता बलिया कृषि कानून व लखीमपुर कांड को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के रेल र

JagranMon, 18 Oct 2021 06:19 PM (IST)
प्लेटफार्म से ट्रैक तक फोर्स, रोके गए किसान, दौड़ती रहीं ट्रेनें

जागरण संवाददाता, बलिया : कृषि कानून व लखीमपुर कांड को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के रेल रोको आंदोलन के मद्देनजर जिले में रेलवे स्टेशनों पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। कई जगह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पटरी पर जाने से रोक दिया। सोमवार की सुबह से शाम तक रेलवे ट्रैक की निगहबानी जारी रही। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। वहीं कई किसान नेताओं को चौथे दिन भी नजरबंद रखा गया। उनके घरों पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। इसको लेकर उनमें आक्रोश व्याप्त है। बलिया, रसड़ा, फेफना, रेवती, बिल्थरारोड, चितबड़ागांव, बांसडीहरोड, सुरेमनपुर व अन्य रेलवे स्टेशनों पर भारी संख्या में पुलिस के जवान तैनात किए गए थे। स्टेशनों पर आने वाले लोगों से पूछताछ की जा रही थी। किसी को बिना टिकट प्रवेश नहीं दिया गया। कुछ स्थानों पर ट्रैक पर पहुंचने से पहले किसानों को हिरासत में ले लिया गया। उच्चाधिकारी पूरी व्यवस्था की मानिटरिग करते रहे। बलिया स्टेशन जाते समय पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। यहां आरपीएफ, जीआरपी के साथ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

---------------------- आंदोलन से पहले गिरफ्तार किए गए किसान नेता :

रसड़ा : रेल रोको आंदोलन से पहले कोतवाली पुलिस ने संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक मंडल के सदस्य राघवेंद्र कुमार को सोमवार की सुबह उनके गांव कंसो-पटना से गिरफ्तार कर लिया। रेलवे स्टेशन पर एसडीएम प्रभुदयाल, प्रभारी निरीक्षक शिवशंकर सिंह, आरपीएफ प्रभारी आनंद सिंह के नेतृत्व में पुलिस फोर्स दोपहर बाद तक तैनात रही। रसड़ा में भी आंदोलन विफल रहा। सुरक्षा के बीच ट्रेनों का नियमित समय से आवागमन जारी रहा।

------------------ सुरेमनपुर पहुंचे अधिकारी, नहीं दिखे आंदोलनकारी

बैरिया : सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन पर सुबह से पुलिस बल के साथ अधिकारी डटे रहे। यहां कोई भी आंदोलनकारी नजर नहीं आया। लगभग चार घंटे तक एसडीएम अभय कुमार सिंह व सीओ अशोक मिश्र के नेतृत्व में फोर्स स्टेशन पर जमी रही। बलिया व छपरा की ओर जाने वाली ट्रेनों को पार कराने के बाद लगभग दो बजे स्टेशन से वापस लौटे।

------------------- ट्रेनों के गुजरने के बाद पुलिस ने ली राहत की सांस :

रेवती : रेलवे स्टेशन पर दिनभर पुलिस तैनात रही। लक्ष्मण पांडेय, मुन्नू कुंवर, रामराज्य व जीउत यादव व अन्य किसान नेताओं को सहतवार पुलिस ने नजरबंद रखा। लोगों को शुक्रवार से हाउस अरेस्ट किया गया है। एसएओ रामायण सिंह, एसआई अजय यादव सिपाहियों के साथ सुबह से प्लेटफार्म पर चक्रमण करने लगे। ट्रेनों के जाने के बाद पुलिस कर्मियों ने राहत की सांस ली। आरपीएफ प्रभारी शत्रुघ्न कुमार द्विवेदी व जीआरपी प्रभारी सत्यनारायण प्रसाद भी एक दर्जन पुलिस कर्मियों के साथ स्टेशन पर जमे रहे। दलछपरा हाल्ट स्टेशन पर भी पुलिस तैनात रही।

----------------- ट्रेन जाने के बाद हिरासत से छोड़े गए किसान

सहतवार : स्टेशन पर ट्रेन रोकने के लिए पहुंचे सात किसानों को सहतवार पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सुबह छपरा-दुर्ग एक्सप्रेस के रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही किसान वहां आ गए। जीऊत पासवान, लक्ष्मीना देवी, परमात्मा वर्मा, अखिलेश प्रसाद, हरेंद्र राजभर, गीता देवी, बालेश्वर शर्मा झंडा लहराने लगे। वहां पहले से तैनात थानाध्यक्ष वीरेंद्र यादव व चौकी इंचार्ज राजीव कुमार ने सभी को हिरासत में ले लिया। ट्रेन गुजरने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

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मनियर में रात से अलर्ट रहे पुलिसवाले, कई गिरफ्तार

मनियर : क्षेत्र में पुलिस रात से ही अलर्ट मोड पर रही। सोमवार की सुबह से ही पुलिस व पीएसी के जवान क्षेत्र में चक्रमण करते रहे। रेल रोको आंदोलन की तैयारी में जुटे एक दर्जन से अधिक लोगों को पुलिस ने खेजुरी मोड़ से गिरफ्तार कर लिया। किसान नेता बसंत कुमार को पुलिस ने रविवार से ही नजरबंद कर रखा था।

नजरबंद करने के फैसले की हुई निदा :

सुखपुरा : क्षेत्र के तीन गांवों के चार किसान नेताओं की नजरबंदी सोमवार को भी जारी रही। इनमें यमुना प्रसाद वर्मा, शिव बहादुर यादव, रामनाथ यादव व नथुनी वर्मा शामिल हैं। इनके आवासों पर एक-एक पुलिस कांस्टेबल की तैनाती की गई है। किसान नेताओं ने कहा कि किसानों की आवाज को सरकार दबा नहीं पाएगी। किसान आखिरी दम तक लड़ने को तैयार है। विप्लव सिंह, पारसनाथ सिंह, विक्रमा राम, शिवजी राम, दीनानाथ सिंह, सुरेश राजभर, गुलामन राजभर, राजू सिंह, फूल मोहम्मद आदि ने नजरबंद करने की कार्रवाई की निदा की है। किसान नेता बोले, जारी रहेगा प्रदर्शन : --किसानों के साथ जब तक न्याय नहीं होगा प्रदर्शन का सिलसिला चलता रहेगा। अन्नदाताओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है। संघर्ष और तेज होगा।--राघवेंद्र कुमार, किसान नेता, रसड़ा। --सरकार दमनात्मक रास्ता छोड़कर किसानों की भावना को समझे। कृषि कानून वापस होने के साथ लखीमपुर खीरी की घटना के दोषियों को सख्त सजा मिले।--लक्ष्मण पांडेय, किसान नेता, रेवती। --सत्ता में बैठे लोग ताकत के बल पर मनमानी कर रहे हैं। सरकार को किसानों की बात सुननी चाहिए। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी आंदोलन जारी रहेगा।--मुन्नू कुंवर, किसान नेता, सहतवार।

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