इन्होंने लड्डू बांटकर मनाया था पहला गणतंत्र दिवस

इन्होंने लड्डू बांटकर मनाया था पहला गणतंत्र दिवस

पाकिस्तान से दो जंग लड़ चुके कैप्टन कमल सिंह को 70 साल पुरानी वो गणतंत्र दिवस की याद ताजा है।

JagranMon, 25 Jan 2021 11:55 PM (IST)

बागपत, जेएनएन। पाकिस्तान से दो जंग लड़ चुके कैप्टन कमल सिंह को 70 साल पुरानी वो गणतंत्र दिवस की पहली सुबह की प्रभात फेरी और जश्न में लड्डू बांटना ऐसे याद है, जैसे कल की बात हो। बोले कि हर किसी के चेहरे पर इतनी खुशी के भाव जिदगी में फिर कभी नहीं देखे जितने तब थे। खुशी में हर कोई झूम रहा था कि अंग्रेजों के जुल्म ढोने वाले नियम-कायदों के बजाय अब खुद का संविधान लागू हो गया..।

खट्टा प्रहलादपुर निवासी 83 वर्षीय कैप्टन राज सिंह गणतंत्र दिवस की पहली सुबह की बात सुन यादों में खो गए। कुछ पल चुप रहने के बाद बताने लगे कि कि 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र दिवस की पहली परेड दिल्ली के नेशनल स्टेडियम जो अब मेजर ध्यानचंद स्टेडिम के नाम से जाना जाता है। तब वह 13 साल के थे और खेकड़ा के स्कूल में पढ़ते थे। अध्यापक और बच्चे कई दिनों से गणतंत्र दिवस की मनाने की तैयारी में जुटे थे। जब वो शुभ घड़ी आई तो उन समेत छात्रों ने तिरंगा हाथ में लेकर प्रभात फेरी निकाली।

प्रभात फेरी के बाद उन्होंने खुद मुंह मीठा किया और दूसरों को लड्डू बांटकर मुंह मीठा कराया। स्कूल से खट्टा प्रहलादपुर लौटे तो गांव गणतंत्र की खुशी में झूमता दिखा। बेशक आज की तरह तब हर हाथ में न मोबाइल थे और न सूचना तंत्र मजबूत था लेकिन लोगों की गणतंत्र दिवस को लेकर दीवानगी ऐसी थी कि पंडित जवाहर लाल नेहरु ने कैसे परेड की सलामी ली और क्या भाषण दिया, यह जानकारी उन्हें थी।

गांवों से लेकर कस्बों तक हर चेहरे पर पहले गणतंत्र दिवस की खुशी थी और हर जुबां पर चर्चा थी कि अब जनता की चुनी सरकार जनता के लिए होगी। बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकरजी का वो भाषण याद है जब उन्होंने कहा था हमनें संविधान बनाकर दिया। शासन चलाने वालों की जिम्मेदारी है संविधान का पालन करना। संविधान लागू होने से लोकतंत्र मजबूत हुआ है। शांति बनाए रखें किसान

उन्होंने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली की सीमा पर बैठे किसानों को शांति बनाए रखने की अपील की है। सेना में रहे पिता और पुत्र

कै. कमल सिंह 1957 में राजपूताना रेजिमेंट में सिपाही से भर्ती होकर 1985 में कैप्टन पद से रिटायर्ड हुए। साल 1965 व 1971 की पाकिस्तान से जंग लड़ी। उनका बेटा ब्रजपाल सेना में हवालदार पद से रिटायर्ड हुआ।

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