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किसानों ने पूछा, चाकू के जुर्म में तोप की सजा क्यों

जागरण न्यूज नेटवर्क, बागपत: बुधवार को विकास भवन में किसान दिवस में किसानों ने बिजली चोरी के मामले में हंगामा कर डीएम समेत तमाम अफसरों से पूछा कि चाकू के जुर्म में तोप की सजा..यह कैसा इंसाफ है? आठ दिन की बिजली चोरी पर 365 दिन का जुर्माना लगा दिया गया है। भाकियू के बिजेंद्र सिंह ने कहा कि ऊर्जा निगम ने भगवानपुर के एक किसान पर बिजली चोरी कर कोल्हू चलाने के जुर्म में 3.27 लाख जुर्माना लगाकर आरसी जारी कर दी। यदि मान भी लें कि किसान ने बिजली चोरी की, तब भी तीन माह से ज्यादा कोल्हू नहीं चलेगा। फिर ऊर्जा निगम ने प्रतिदिन 18 घंटे बिजली आपूर्ति के हिसाब से एक साल का जुर्माना लगा दिया।

ऊर्जा निगम एसई रणविजय सिंह ने नियम का हवाला देकर समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान नहीं माने। भाकियू नेता राजेंद्र सिंह व हिम्मत सिंह, जिलाध्यक्ष चौ. प्रताप गुर्जर और विजयपाल समेत तमाम किसानों ने कहा कि ऐसे नियम बदलिए जिससे नाइंसाफी होती हो। डीएम शकुंतला गौतम तेवर दिखाते बोलीं कि कि यह सब्जी मंडी नहीं किसान दिवस है। अपनी समस्या शालीनता से रखिए, ताकि समाधान करा सकें। फिर एसई ने किसानों की बात काटते हुए कहा कि केवल 66 दिन का जुर्माना लगा है। जुर्माना प्रतिदिन 18 बिजली सप्लाई के आधार पर 90,154 यूनिट की बिजली चोरी का 1.55 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।

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बछिया क्यों नहीं जन्मी

किसानों ने डीएम से कहा कि पशुपालन विभाग ने दावा किया था कि कृत्रिम गर्भाधान से बछिया ही पैदा होगी। गाय को कृत्रिम गर्भाधान कराने पर भी बछिया नहीं जन्मी..बछड़ा जन्मा। ऐसा क्यों? मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. रविद्र कुमार ने कहा कि बागपत को अभी ऐसा सीमन नहीं मिला कि बछिया ही जन्मे। कुछ दिन और इंतजार करना होगा। किसानों ने बेसहारा गोवंश से निजात दिलाने, नंगला जाफराबाद गांव में बिजली आपूर्ति कराने, ओवरलोड गन्ना कटौती बंद कराने, रमाला चीनी मिल में किसानों के अतिरिक्त गन्ना आपूर्ति का अनुबंध कराने, बिजली बिलों की गड़बड़ी दूर कराने, किसान सम्मान निधि योजना से वंचित किसानों को लाभ दिलाने की आवाज उठाई। डीएम ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे लिए किसान पहले हैं। किसानों की समस्याओं का निराकरण करना ही होगा। सीडीओ पीसी जायसवाल, जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह, जिला गन्ना अधिकारी डा. अनिल कुमार भारती तथा किसान इंद्रपाल समेत अनेक किसान मौजूद रहे।

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