कोरोना से उबरने में मनोवृत्ति का ही योगदान

वैज्ञानिक ²ष्टिकोण मूलत एक ऐसी मनोवृति या सोच है जिसका मूल आधार किसी भी घटना की पृष्ठभूमि है।

JagranWed, 27 Oct 2021 09:54 PM (IST)
कोरोना से उबरने में मनोवृत्ति का ही योगदान

बागपत, जेएनएन। वैज्ञानिक ²ष्टिकोण मूलत: एक ऐसी मनोवृति या सोच है, जिसका मूल आधार किसी भी घटना की पृष्ठभूमि में उपस्थित कार्य करण को जानने की प्रवृत्ति है। वैज्ञानिक ²ष्टिकोण हमारे अंदर अन्वेषण की प्रवृत्ति विकसित करती है तथा विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सहायता करती है। वैज्ञानिक ²ष्टिकोण की शर्त है कि बिना किसी प्रमाण के किसी भी बात पर विश्वास न करना या उपस्थित प्रमाण के अनुसार ही बात पर विश्वास करना।

वैज्ञानिक ²ष्टिकोण से तात्पर्य है कि हम तार्किक रूप से सोचे। जन सामान्य में वैज्ञानिक ²ष्टिकोण का विकास करना हमारे संविधान के अनुच्छेद 51ए के अंतर्गत मौलिक कर्तव्य में से एक है, इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वैज्ञानिक ²ष्टिकोण के विकास के लिए कार्य करे। हमारे संविधान निर्माताओं ने यही सोचकर वैज्ञानिक ²ष्टिकोण को मौलिक कर्तव्यों की सूची में शामिल किया होगा कि भविष्य में वैज्ञानिक सूचना एवं ज्ञान में वृद्धि से वैज्ञानिक ²ष्टिकोण युक्त चेतना संपन्न समाज का निर्माण होगा, परंतु वर्तमान सत्य इससे परे है। जब अपने कार्य क्षेत्र में विज्ञान की आराधना करने वाले वैज्ञानिकों का प्रत्यक्ष सामाजिक व्यवहार ही वैज्ञानिक ²ष्टिकोण के विपरीत हो तो बाकी बुद्धिजीवियों तथा आम शिक्षित अशिक्षित लोगों के बारे में क्या अपेक्षा कर सकते हैं।

वैज्ञानिक ²ष्टिकोण का संबंध तर्कशीलता से है। वैज्ञानिक ²ष्टिकोण के अनुसार वही बात ग्रहण करने योग्य है जो प्रयोग और परिणाम से सिद्ध की जा सके। चर्चा तर्क और विश्लेषण वैज्ञानिक ²ष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण अंग है। मानवता, लोकतंत्र, समानता आदि के निर्माण में भी वैज्ञानिक ²ष्टिकोण कारगर सिद्ध होता है। वैज्ञानिक मनोवृत्ति हमें जीवन जीना सिखाती है। कोरोना काल में इसे सच कर दिखाया है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से उबरने में इस मनो वैज्ञानिक मनोवृत्ति का ही योगदान है। आज हमारा देश कोरोना टीकाकरण अभियान में नई बुलंदियों पर पहुंच रहा है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से मिनटों में हम अपनी बात एक दूसरे को आसानी से पहुंचा सकते हैं। यह सब वैज्ञानिक सोच की ही देन है। आज मनुष्य चांद और मंगल पर रहने की तैयारी कर रहा है। यह सब वैज्ञानिक मनोवृत्ति की ही बदौलत संभव हो रहा है। अब तो त्योहारों का आधार पर वैज्ञानिक बन गया है।

भारतीय संविधान अनुच्छेद 51 एक मूल कर्तव्य भारत के नागरिक कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें। स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेषित करने वाले उच्च आदर्शों को ह्दय में सजाए रखें और उसका पालन करें। भारत को एकता, प्रभुता और अखंडता की रक्षा करें। देश की रक्षा करें और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें। भारत के सभी लोगों में सामान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें। जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं। सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित रखें और हिसा से दूर रहे। यदि माता-पिता या संरक्षक है छह वर्ष से 14 वर्ष की आयु वाले अपने यथास्थिति बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करें।

रणवीर सिंह, प्रधानाचार्य वनस्थली पब्लिक स्कूल बड़ौत

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