हिम्मत और होशियारी से बचा ली भाई-बहन की जान

बिसौली : महापुरुषों का कथन है कि धैर्य के साथ काम करने से बड़े से बड़ा काम भी सफलता पूर्वक किया जा सकता है। कुछ इसी तरह का कार्य क्षेत्र के गांव ललुआनगला के एक गरीब मजदूर की बेटी ने किया। घर में निकले जहरीले सांप को उसने डिब्बे में बंद कर लिया। जिससे उसके भाई-बहनों की जान बच गई। ललुआनगला गांव के निवासी मुनेश उर्फ मस्ताना का कच्चा मकान है। वह अपने पत्नी व बच्चों के साथ आसपास के गांव में कला का प्रदर्शन करके गुजारा करता है। बीते सोमवार को सुबह उसके घर में एक पुराना जहरीला सांप दिखाई दिया। जिसको मुनेश की छोटी बेटी ज्योति ने देख लिया और उसने परिजनों को बताया कि तब तक सांप कहीं अ²श्य हो गया। मंगलवार की रात लगभग 11 बजे वह सांप एक तख्त पर चढ़ गया। जिसके पास मुनेश के छोटे बेटे हरिओम और कृष्णा सो रहे थे। मुनेश अपनी पत्नी के साथ बरामदा के पास बनी झोपड़ी में सो रहा था। मुनेश की बेटी आरती और ज्योति भी एक अलग पलंग पर बेटों के पास लेटी थी। दिन में सांप घर में घुसने की वजह से आरती उस समय जाग रही थी और कमरे में दीपक जल रहा था। सांप देखकर आरती के होश उड़ गए। उसने सांप को आहट नहीं होने दी और सांप के पास प्लास्टिक का डिब्बा ढक्क्न अलग करके रख दिया। सांप कुछ ही देर में उस डिब्बे पर अठखेलियां करने लगा और उसी समय वह डिब्बे में घुस गया। आरती ने हिम्मत दिखाते हुए सांप को डिब्बे से बाहर निकलने से पहले ढक्कन लगाकर बंद कर दिया और शोर मचाया। डिब्बे में सांप देखकर मुनेश और उसकी पत्नी संतोष नागर हतप्रभ रह गए। आरती ने अपने छोटे भाईयों को गले लगा लिया और ईश्वर को धन्यवाद देने लगी। कुछ ही देर में गांव में सांप पकड़ने की चर्चा फैल गई और काफी संख्या में लोग आ गए। आरती की सभी पीठ थपथपाने लगे। आरती और उसकी मां संतोष नागर ने सांप को मारने नहीं दिया। डिब्बे में बंद सांप को बुधवार को अरिल नदी के जंगल में ¨जदा छोड़ दिया गया। आरती ने इसी वर्ष कक्षा आठ गांव के सरकारी स्कूल से पास किया है।

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