तिलक की तैयारी भूल करा रहे अंतिम संस्कार

तिलक की तैयारी भूल करा रहे अंतिम संस्कार

मुश्किल वक्त है कोरोना संक्रमण के रोज नए मरीज सामने आ रहे। अस्पतालों में स्टाफ जूझता दिख रहा। इन हालात में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो निजी जरूरत को दरकिनार कर अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे ताकि संसाधनों की कमी आडे़ न आए। इन्हीं में रजत कुमार और उनके धनीराम हैं।

JagranSat, 17 Apr 2021 12:56 AM (IST)

अजयवीर सिंह, शाहजहांपुर : मुश्किल वक्त है, कोरोना संक्रमण के रोज नए मरीज सामने आ रहे। अस्पतालों में स्टाफ जूझता दिख रहा। इन हालात में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो निजी जरूरत को दरकिनार कर अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे, ताकि संसाधनों की कमी आडे़ न आए। इन्हीं में रजत कुमार और उनके धनीराम हैं। 26 अप्रैल को रजत का तिलक है, मगर तैयारियों को भूलकर वे कोरोना संक्रमण से दम तोड़ने वालों का अंतिम संस्कार करा रहे हैं।

रजत और उनके पिता धनीराम राजकीय मेडिकल कालेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। रजत की शादी तय हो चुकी है। 26 अप्रैल को तिलक, 14 मई को शादी है। जब रिश्ता तय हुआ तब हालात सामान्य थे। इस बीच अप्रैल की शुरूआत से कोरोना संक्रमण के नये मामले सामने आने लगे। पांच सौ से ज्यादा सक्रिय मरीज हैं, 16 दिन में 15 मौतें हो चुकी हैं। स्थिति देख पिता, पुत्र की ड्यूटी शवों के अंतिम संस्कार में लगा दी गई। बिना किसी शिकवा-शिकायत वे दोनों अपने काम को अंजाम दे रहे। कहते हैं कि 14 दिन की ड्यूटी 21 अप्रैल को खत्म होगी, तभी तैयारियां पूरी कर लेंगे।

पहले ड्यूटी, परिवार बाद में

रजत कहते हैं कि महामारी फैली हुई है। मुझे जो जिम्मेदारी दी गई है, पहले उसे निभाऊंगा। परिवार और बाकी काम बाद में कर लेंगे। लगातार ड्यूटी के कारण घर जाने की अनुमति नहीं है। फोन पर मां शीला देवी, छोटे भाई अभिषेक और बहनोई मिथुन से बात हो जाती है। वे लोग अपने स्तर से कुछ तैयारियां कर रहे हैं। ड्यूटी स्थल से आवास की दूरी बमुश्किल सौ मीटर है, मगर 21 अप्रैल से पहले वहां नहीं जाऊंगा। जांच कराने के बाद घर पहुंचकर चार-पांच दिन में जो संभव हो सकेगा, काम निपटा लूंगा।

70 शवों की करा चुके अंत्येष्टि

पिता-पुत्र एक साल में करीब 70 कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। बिना अवकाश ड्यूटी कर वे विभागीय अधिकारियों से सराहना पा चुके है। इस बार अप्रैल से संक्रमण का स्तर बढ़ा, तब भी उन्हें जिम्मेदारी दे दी गई।

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बेटी के हाथ पीले करने से ज्यादा ड्यूटी की चिता

राजकीय मेडिकल कालेज में जिन आठ कर्मचारियों को इस काम में लगाया गया है, उनमें कमलेश कुमार भी हैं। उनकी बेटी काजल की शादी चार मई को होनी है। 28 अप्रैल को तिलक जाना है। 20 अप्रैल तक उनकी ड्यूटी है। कहते हैं कि बेटी के हाथ पीले करने से ज्यादा ड्यूटी की चिता है। खुद को सुरक्षित रखते हुए काम करना है। बाकी तैयारियां बाद में कर लेंगे।

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कोरोना संक्रमण में सभी स्वास्थ्यकर्मी बेहतर काम कर रहे। धनीराम, रजत, कमलेश आदि कई ऐसे कर्मचारी हैं जो निजी कार्यो के बजाय ड्यूटी को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों से अन्य लोगों को भी सीख लेने की जरूरत है। मांगलिक कार्यक्रम नजदीक होने के बाद भी इन्होंने अब तक अवकाश के लिए कोई प्रार्थना पत्र भी नहीं दिया है।

डॉ. एयूपी सिन्हा, सीएमएस

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