स्वास्थ्य महकमे की आंकड़ेबाजी में गुमराह हो गए डीजी

बदायूं : डीजी हेल्थ डॉ. पद्माकर ¨सह बदायूं भले ही बुखार की वजह तलाशने और यहां चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा करने आए थे, लेकिन यहां जिले के अफसरों के रंग में रंगे नजर आए। जो रिपोर्ट खुद की आंकड़ेबाजी करके बदायूं के अफसरों ने तैयार की, उसी को सही ठहराते हुए यहां के लापरवाह अधिकारियों को सही ठहराते दिखाई दिए। वह यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि जिले में 56 से ज्यादा मौतें हुई हैं। उनका कहना था कि जो भी आंकड़ा यहां की टीम ने तैयार किया है, वह सही है। डीजी हेल्थ से पूछा गया कि जब पहले से ही जगत और सलारपुर ब्लाकों में हर साल बुखार महामारी का रूप लेता है तो पहले से स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी क्यों नहीं की। इस पर बोले कि जब तत्कालीन सीएमओ ने रिपोर्ट ही नहीं भेजी तो भला क्या तैयारी की जाती। इसी वजह से सीएमओ निलंबित किए गए। महिला अस्पताल प्रशासन पर आए दिन लगने वाले रिश्वतखोरी के आरोपों पर कहा कि यह सीएमओ स्तर का मामला है। नए सीएमओ आकर ही व्यवस्था सुधारेंगे। जिला अस्पताल में दवाओं की किल्लत पर बोले कि मरीज को दवा मिलना जरूरी है, फिर चाहें अस्पताल प्रशासन उसे कहीं से भी लाकर दे। इतना जरूर कहा कि शासन की टीम ने अपना पूरा काम किया है। बुखार के खात्मे तक टीम जुटी रहेगी। लोकल टीम के बस का नहीं बुखार

डीजी ने बताया कि लोकल की टीमें भले ही जुटी थीं लेकिन इस बुखार पर काबू पाना उनके बस का नहीं था। जबकि अब शासन की टीम आने से काम का तरीका बदला है। पूरे गांव के मरीजों की केस हिस्ट्री के आधार पर इलाज किया जा रहा है। वहां से संक्रमण हटाया जा रहा है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से भी बुखार होने पर तत्काल संबंधित सीएचसी पर सूचना देने को लगाया है। ताकि समय रहते ट्रैक करके समस्या को निपटाया जा सके।

गंदगी व दुर्दशा को भी किया नजरंदाज

डीजी ने महिला अस्पताल का मुआयना किया तो गेट पर ही गंदगी पड़ी थी। वार्डों में पंखे चल नहीं रहे थे लेकिन मरीजों की यह दुर्दशा को भी डीजी ने नजरांदाज कर दिया। पूरे अस्पताल का चक्कर लगाकर इतना ही कहा कि सफाई व्यवस्था ठीक कर लें। वहीं जिला अस्पताल पहुंचने के बाद स्टोर का निरीक्षण किया और दवाओं के स्टाक की जानकारी ली। इमरजेंसी वार्ड में जाकर मरीजों का हाल जाना। वहीं रैनबसेरे के पास फैली गंदगी की कुछ महिला तीमारदारों ने शिकायत की लेकिन उस पर भी गौर नहीं किया। हार्ट वार्ड भी गए और मेडिसिन वार्ड भी देखा। वहां भी गर्मी में पंखे नहीं चलते मिले तो खामोशी से चले गए। कुछ मरीजों ने बारिश में वार्ड टपकने की शिकायत की तो भी उसे सुनकर आगे बढ़ गए।

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