जनपद में 200 विशेषज्ञ डाक्टरों का पद रिक्त

जनपद में 200 विशेषज्ञ डाक्टरों का पद रिक्त

जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : जनपद की कुल आबादी पचास लाख के करीब है। यहां कुल 307 डाक्टरा

JagranFri, 27 Oct 2017 06:03 PM (IST)

जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : जनपद की कुल आबादी पचास लाख के करीब है। यहां कुल 307 डाक्टरों का पद सृजित है लेकिन मात्र 128 डाक्टरों के सहारे किसी तरह काम चलाया जा रहा है। यानी लगभग 200 विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी हैं। आबादी के हिसाब से चिकित्सकों की संख्या कम होने की वजह से लोगों का बेहतर उपचार नहीं हो पा रहा है। इससे गरीब सहित आम लोगों को प्राइवेट डाक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा

है। यहां उनके साथ धनउगाही की जा रही है।

बलिया में छठ पूजा के दौरान तबीयत खराब होने पर उपयुक्त इलाज न मिल पाने के कारण शुक्रवार को एक व्रती महिला की मौत ने स्वास्थ्य विभाग के काम काज पर सवाल खड़ा कर दिए हैं। जनपद में भी स्वास्थ्य विभाग की स्थिति डंवाडोल हैं। किसी तरह यहां के स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी ¨खच रही है। पूरे जिले में कुल 109 स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसमें 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 69 से अधिक है। इसमें जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और महिला पुरुष अस्पताल अतरौलिया भी शामिल हैं। अतरौलिया नया अस्पताल पिछले साल भर से चल रहा है। अभी यहां पर्याप्त डाक्टर नहीं है। सात ईएमओ का पद भी खाली चल रहा है। आर्थों, यूरोलाजी, रेडियालाजिस्ट के पद खाली चल रहे हैं। सात डाक्टरों के 200 पद लगभग खाली चल रहे हैं। इसके अलावा तमाम विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी से जनपद के स्वास्थ्य केंद्र जूझ रहे हैं। यहां सात रेडियोलाजिस्ट का पद है। केवल एक

रेडियोलाजिस्ट के सहारे पूरे जनपद की व्यवस्था चल रही है। जिला अस्पताल में

चार ईएमओ का पद खाली है। यहां मात्र एक ईएमओ तैनात हैं। इसी प्रकार

स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टरों की भारी कमी है। विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों को अटैच कर किसी तरह स्वास्थ्य विभाग काम चला रहा है। अस्पतालों में डाक्टरों की कमी की वजह से लोगों को प्राइवेट का सहारा लेना पड़ रहा है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। मच्छरों के प्रकोप से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। वर्तमान समय में डायरिया, वायरल फीवर सहित तमाम रोगों

ने पांव पसारना शुरू कर दिया गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग कितनी बेहतर

सुविधा उपलब्ध कराएगा, इसका सहज ही कयास लगाया जा सकता है। मौसम परिवर्तित हो रहा है, ऐसे में तमाम लोग वायरल फीवर, खांसी, जुकाम व नजला से परेशान

हैं।

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कई गर्भवती महिलाओं की हो चुकी है मौत जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं पर नजर डाली जाए तो पिछले कुछ सालों में कई गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है। इसे लेकर कई बार महिला अस्पताल में हंगामा के साथ तोड़-फोड़ भी हुई है। डाक्टर व स्टाफ नर्स के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी। इसी प्रकार जिला अस्पताल में भी लापरवाही पर लोगों का आक्रोश देखने को मिला है। इसके पीछे डाक्टरों की कमी व लापरवाही बताया जा रहा है।

यह है स्थिति

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-50 लाख के करीब है जनपद की आबादी

-12 स्वास्थ्य केंद्र हैं चिकित्सक विहीन

-307 चिकित्सकों का पद है सृजित

-128 डाक्टर विभिन्न स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात

-50 के करीब है पैरामेडिकल स्टॉफ--33 स्टाफ नर्स हैं तैनात-----------

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पूरे प्रदेश स्तर पर

विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। शासन स्तर से डाक्टरों के चयन की प्रक्रिया

के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। शासन स्तर से जल्द ही डाक्टरों की तैनाती की जाएगी। फिलहाल सीमित संसाधनों में किसी तरह कार्य किया जा रहा है।

डा. एसके तिवारी : मुख्य चिकित्साधिकारी

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