जमीन पर काम नहीं , डेढ़ करोड़ का भुगतान

जागरण संवाददाता, आजमगढ़ :

जनपद के तरवां विकास खंड की एक ऐसी ग्राम पंचायत हैं जहां तीन साल में ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी ने मिलकर विभिन्न मदों में कागज पर काम दिखाकर डेढ़ करोड़ से अधिक रुपये का भुगतान करा लिया और हजम कर गए। यही नहीं आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण व पोखरे की खोदाई भी कागज पर करवा दिया। आरटीआइ सहित अन्य माध्यमों से गांव के लोगों को जब इसकी जानकारी हुई तो उनकी पैरों तले जमीन खिसक गई। गांव के लोग मामला लेकर जब जिलाधिकारी दरबार पहुंचे तो वह भी अचंभित हो गए। उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी को ग्राम पंचायत में हुए कार्यों की जांच करने का निर्देश दिया। यह सारा मामला आरटीआइ के मांगी गई सूचना से उजागर हुआ है।

तरवां की बरवां ग्राम पंचायत ऐसी है जहां वर्ष 2016 से लेकर 2019 तक कुल 33 कार्य कराए गए हैं। इसमें चौदहवें वित्त आयोग से लेकर अन्य तमाम मद शामिल हैं। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी को दिए गए प्रार्थना पत्र में गांव के संजय कुमार ¨सह, संतोष कुमार ¨सह, नागेंद्र ¨सह आदि ने जो आरोप लगाए हैं, उसकी सत्यता अगर जांच में सही निकलती है तो यह जनपद का सबसे बड़ा ग्राम पंचायतों का घोटाला साबित होगा। ग्राम पंचायत में वित्तीय वर्ष 2017-18 में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कराया गया है। इसके लिए 7.50 लाख रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि कहीं भी आंगनबाड़ी केंद्र ही नहीं है। इसी प्रकार रामअवध के खेत में तालाब खोदाई के कार्य मनरेगा के तहत एक जून से 30 सितंबर तक कार्य दिखाया गया है। इसके तहत 1,25000 रुपये का भुगतान किया गया है। इस खेत में कोई तालाब खोदा ही नहीं गया है। अन्य मदों में भी लाखों का भुगतान

प्राथमिक विद्यालय में भोजन शेड व डेस्क बेंच के निर्माण के लिए दो लाख, शौचालय मरम्मत को 40-40 हजार, आंगनबाड़ी केंद्र के मरम्मत को 91 हजार, इंटरला¨कग निर्माण को 11,35000 रुपये का भुगतान किया गया है, यानी यह केवल कागज में दिखाकर भुगतान किया गया है। वास्तविक रूप से कहीं काम हुआ ही नहीं है। इसी प्रकार तमाम अन्य मदों में इसी तरह का भुगतान किया गया है। कुल मिलाकर डेढ़ करोड़ से अधिक का भुगतान मात्र कागजों में किया गया है। यह मामला बेहद संवेदनशील है। ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी ने सरकारी धन का पूरी तरह से गबन किया है। डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ से जांच करवाकर दोषी के विरुद्ध हर हाल में कड़ी कार्रवाई जहां की जाएगी, वहीं धनराशि रिकवरी भी होगी।

-डीएस उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी। सारा कार्य हमारा भांजा देखते हैं। उन्हीं से बात कर लीजिए। पत्नी हमारी अभी कहीं बाहर गई हैं। उनसे बात संभव नहीं हैं। फिलहाल आप गांव में आइए तो पता चल जाएगा कि कार्य हुआ है कि नहीं।

-सरजू यादव, प्रधान ऊषा यादव के पति।

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