झाड़ू की तीलियों से मजबूत की आजीविका की लाठी

जासं, आजमगढ़ : 'जहां सोच वहीं राह, काम कोई खराब नहीं, बस उसके साथ दिल्लगी होनी चाहिए' कुछ यही सोच दिल में लिए विकास खंड ठेकमा क्षेत्र के बड़गहन गांव की महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। समूह बनाकर यह महिलाएं झाड़ू बनाती हैं। पहले काम को लेकर मन में बहुत हिचक थी पर देश में जब से स्वच्छता मिशन की शुरुआत हुई और प्रधानमंत्री ने स्वयं हाथ में झाड़ू उठाई, महिलाओं के काम को एक सर्टिफिकेट मिल गया। यह सर्टिफिकेट किसी कागज का नहीं बल्कि विश्वास का था। अब यह महिलाएं इस काम को अपने सम्मान से जोड़कर देखती हैं। पुरुष भी बहुत साफगोई संग इसको स्वीकार करता है कि मेरे घर की महिलाएं झाड़ू बनाती हैं। इतना ही नहीं घर की लक्ष्मी से ही हमारे बटुए की लक्ष्मी निहाल हो रही है।

स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि एनजीओ द्वारा दो स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया है। इसमें एक समूह में 12-12 महिलाएं शामिल की गई हैं। मीरा महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष चंद्रकला ने बताया कि समूह से जुड़ी महिलां हर महीने 50 रुपये जमा करती हैं। महीने का साढ़े पांच सौ रुपये होता है। इससे झाड़ू में उपयोग होने वाले सभी सामान जौनपुर से लाए जाते हैं। इसके बाद इसका निर्माण होता है। इसमें समूह के अलावा अन्य महिलाएं भी कार्य करती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य होता है कि महिलाएं आत्मनिर्भर बने और आत्मविश्वास संग आगे बढ़े। बस जरूरत है तो सरकारी सहायता की। ब्लाक स्तर के अधिकारी नहीं आते हैं। एक बार ठेकमा बीडीओ आए थे और पूरी जानकारी लेकर चले गए लेकिन इस पर ध्यान नहीं गया। दूसरी समूह गंगाजन महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष संगीता ने बताया कि हम सभी लोग एक होकर कार्य करते हैं। बारह महिलाओं की टीम सात सालों से कार्य कर रही है। टीम प्रतिदिन अगल-बगल के गांव में जाकर महिलाओं को इस बारे में जागरूक करती हैं। हमारी कोशिश रहती है कि हर परिवार की एक महिला आत्मनिर्भर बने और अपने परिवार के खर्च में सहयोगी बने। समूह से जुड़ी महिलाएं इस काम से प्रतिदिन पांच सौ रुपये तक की आमदनी कर लेती हैं। बरदह बाजार समेत अन्य छोटे बड़े बाजारों में महिलाएं स्वयं झाड़ू पहुंचाने को जाती हैं। मुकम्मल बाजार की दरकार

स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि सरकार एक मुकम्मल बाजार की व्यवस्था उपलब्ध करा दे तो हम सब की सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। झाड़ू तो अभी बिक रहे हैं पर जिस तेजी के साथ महिलाएं इस कारोबार के साथ जुड़ रही हैं। झाड़ू का उत्पाद हो रहा है उससे आगे भविष्य में अच्छी कीमत मिलने को लेकर संघर्ष तय है।

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