432 आवास पर फिर अड़ंगा, तीसरी बार निविदा खारिज

जासं, आजमगढ़ : शहरी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (सहयोग से किफायती आवास) के अंतर्गत बनने वाले 432 आवास अभी जमीन पर मूर्तरूप होते नहीं दिख रहा है। पिछले तीन वित्तीय वर्ष से इस योजना को लेकर महज कागजी कार्रवाई ही पूरी की जा रही है। सरकार के पांच साल होने जा रहे है पर अधिकारी जन-जन से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजना को लेकर गंभीर नहीं हैं। तीसरी बार मानक पर खरा न उतरने के कारण एडीए कमेटी के सदस्य वित्त नियंत्रक/मुख्य कोषाधिकारी ने निविदा निरस्त कर दिया है। निर्देशित किया है कि फिर टेंडर कराया जाए। उधर, इस वित्तीय वर्ष में आवास निर्माण शुरू होने के साथ ही जरूरतमंदों को समय से आवास मिलने की आशा धूमिल हो गई है।

कार्यदायी संस्था एडीएम (आजमगढ़ विकास प्राधिकरण) को तीन वित्तीय वर्ष कुल 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में 800 आवासों का निर्माण कराना है। पहले वित्तीय वर्ष में 500 आवासों का निर्माण कराया जाना था, लेकिन प्रशासन द्वारा सिधारी स्थित होमगार्ड आफिस के समीप लगभग 1.49 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई जिसमें 432 आवास बन सकेंगे। प्रदेश व केंद्र सरकार से परियोजना की स्वीकृति मिलने के बाद प्राधिकरण द्वारा 20 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी गई थी, जिसके सापेक्ष 17 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। आवास निर्माण के लिए तीन बार निविदा आमंत्रित की गई। दो बार सिर्फ एक-एक लोगों की ओर से टेंडर डालने के कारण एकल टेंडर मानते हुए निरस्त कर दिया गया। दोनों निविदा की जांच में मिले ये मानक

स्वीकृत 432 आवासों के निर्माण के लिए मऊ के दोनों कंस्ट्रक्टर के अभिलेख टेंडर कमेटी के सामने प्रस्तुत किए गए। इसमें एक कंस्ट्रक्टर के अभिलेख सही मिले, जबकि दूसरे द्वारा समान कार्य के 40 फीसद ही कार्य का प्रमाण पत्र, श्रम विभाग द्वारा पंजीयन प्रमाण पत्र न होना और लेखा-जोखा में पांच साल के बजाए एक ही साल की बैलेंस सीट प्रस्तुत की गई है। प्रमुख बिंदु

-वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में कराया जाना था कुल 800 आवास का निर्माण

-शासन ने पहले वित्तीय वर्ष में 500 आवास निर्माण कराने को दी मंजूरी

-सिधारी स्थित होमगार्ड आफिस पास 432 आवास निर्माण को ही जमीन

-20 करोड़ की डीपीआर के सापेक्ष 17 करोड़ रुपये ही हुआ स्वीकृत ''एडीए कमेटी के सदस्य एवं वित्त नियंत्रक मुख्य कोषाधिकारी के समक्ष टेंडर डालने वाले दोनों कंस्ट्रक्टर के अभिलेख प्रस्तुत किए गए थे जिसमें एक के द्वारा मानक का पूरा न किया जाना मिला। ऐसे में वित्त नियंत्रक ने उसे निरस्त करते हुए फिर से टेंडर कराने को कहा है।

-बाबू ¨सह, सचिव, विकास प्राधिकरण। ''किसी भी कार्य के लिए टेंडर में कम से कम तीन लोगों द्वारा निविदा डाली जानी चाहिए। कंस्ट्रक्टर के सभी अभिलेख मानक पर तो होने ही चाहिए। साथ ही जिस निविदा में न्यूनतम दर होगा, उसी को मान्य करते हुए तकनीकी स्वीकृति प्रदान की जाएगी।

-विजय शंकर, वित्त नियंत्रक व सीटीओ।

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