नौकरी छोड़ गांव लौटे युवाओं को मिला चुनावी रोजगार

नौकरी छोड़ गांव लौटे युवाओं को मिला 'चुनावी रोजगार'

शंकर पोरवाल रुरूगंज समय कब बदल जाए कोई नहीं जानता। कहते हैं कि समय बड़ा बलवान होता

JagranWed, 21 Apr 2021 11:15 PM (IST)

शंकर पोरवाल, रुरूगंज: समय कब बदल जाए, कोई नहीं जानता। कहते हैं कि समय बड़ा बलवान होता है। इसके आगे किसी की नहीं चलती। कुछ ऐसा ही दौर कोरोना काल की दूसरी लहर में

देखने को मिल रहा है। हालांकि इस लहर में पंचायती चुनाव का 'बुखार' भी साथ है। लॉकडाउन होने या कोविड के खतरे को देखकर गांव लौट रहे युवाओं में चुनाव को लेकर ज्यादा उत्साह दिख रहा है। क्योंकि, कोविड के जाल में फंसे ज्यादातर प्रत्याशी या उनके समर्थकों की वजह से चुनाव प्रचार में यह बड़ा माध्यम बन रहे। नौकरी छोड़ आए युवाओं के हाथ बैनर-झंडे देकर उनके मर्ज पर मरहम लगाने का कार्य किया जा रहा।

जीत-हार की राजनीति भी तेज हो चली है। इस बीच कोविड की बढ़ती लहर ने कहीं न कहीं चुनाव मैदान में आने वाले चेहरों को मायूस किया है। उनकी मायूसी उनके स्वस्थ होने तक चेहरे पर होगी। लेकिन, चुनाव जीतने के लिए उनकी ओर से गुणा-भाग घर बैठे लगाया जा रहा है। बाहर क्या चल रहा है, इसके लिए वह लॉकडाउन में घर लौट रहे युवाओं की ओर रुख कर रहे। कुछ प्रत्याशियों ने अपने घर के छोटों या लाडलों को मैदान में सक्रिय कर दिया है। जो दिन में बाहर मतदाताओं के बीच पहुंच चुनाव की थाह ले रहे हैं तो रात में पढ़ाई कर रहे। जिले की ज्यादातर ग्राम पंचायतों में प्रचार को लेकर यह चेहरे देखने को मिल रहे है। वहीं लॉकडाउन की वजह से गांव लौटे कुछ युवाओं ने बताया कि सब कुछ छोड़ वह आए हैं। कुछ न कुछ तो करना ही होगा। चुनाव प्रचार ही सही।

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