सनातन संस्कृति में गो-पूजन मानव जीवन का परम धर्म

सनातन संस्कृति में गो-पूजन मानव जीवन का परम धर्म

जागरण संवाददाता औरैया वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण अष्टमी के रूप में मनाया जाता ह

JagranTue, 04 May 2021 11:20 PM (IST)

जागरण संवाददाता, औरैया: वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। मंगलवार को भी शहर व गांवों में संचालित गोशालाओं में गायों का पूजन अर्चन कर उन्हें घास खिलाई गई। संचालकों ने हवन पूजन कर वैश्विक महामारी से मुक्ति दिलाने की ईश्वर से कामना की। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस को नष्ट करने में गाय का घी बहुत ही उपयोगी है। फफूंद रोड स्थित उमा प्रेम सत्संग आश्रम के संचालक आचार्य मनोज अवस्थी ने गोशाला पहुंचकर गायों को स्थान कराकर उनका पूजन किया। करीब एक दर्जन गायों को हरी घास, गुड़-चना आदि का सेवन कराया। उन्होंने कहा कि जल वर्षा के स्वागत के लिए वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि कृष्ण अष्टमी के नाम से जानी जाती है। गो-पूजन का इसमें बड़ा महत्व होता है। सनातन संस्कृति में गाय को मां का दर्जा प्राप्त ही है साथ ही अब तो विज्ञान भी गाय के दूध, गोमूत्र एवं गोधृत, गोबर के अनेकानेक उपयोग बताता है। आज इस महामारी के समय मे भी हम अनुभव कर रहे हैं। जो लोग गांव में एक सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। गाय के दूध एवं उससे बनी ही शुद्ध चीजों का ही प्रयोग करते हैं। वह लोग अभी भी इस महामारी के प्रभाव के काफी दूर हैं। ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी गाय के गोबर से घर को लीपकर शुद्ध करने की परंपरा है। गोमूत्र से पवित्र किया जाता है। वह केवल आस्था नहीं बल्कि उससे बड़ी घातक बीमारियों से हमें छुटकारा मिलता है। ग्राम मढ़ापुर में गोविद गोशाला में भी हवन पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। गाय के गोबर के उपलों से अग्नि प्रज्ज्वलित कर हवन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण से वैश्विक महामारी से मुक्ति के लिए प्रार्थना की गई। गोशाला समिति के कार्यकर्ताओं मुकेश गुप्ता, उत्कर्ष शुक्ला, लालजी अग्रवाल, राजीव पोरवाल आदि ने आहुतियां दीं। कार्यकारी अध्यक्ष संतोष गुप्ता ने बताया कि प्रतिदिन गाय का घी नाक में डालने से कोरोना वायरस के विषाणु नष्ट हो जाते हैं।

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