हरित पटाखों की अनदेखी से बढ़ा प्रदूषण का ग्राफ

गजरौला सुप्रीम कोर्ट व शासन के आदेश के बाद भी औद्योगिक नगरी में अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे छूटे।

JagranFri, 05 Nov 2021 11:37 PM (IST)
हरित पटाखों की अनदेखी से बढ़ा प्रदूषण का ग्राफ

गजरौला : सुप्रीम कोर्ट व शासन के आदेश के बाद भी औद्योगिक नगरी में अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की बिक्री हुई। यही वजह है दीवाली पर छोड़ी बेहिसाब आतिशबाजी से गजरौला का वातावरण इतना प्रदूषित हुआ कि वह खतरे की श्रेणी में पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब शहर की निगरानी शुरू करा दी है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गजरौला में दो हिस्सों पर प्रदूषण की जांच की जाती है। एक औद्योगिक क्षेत्र तो दूसरा आवासीय इलाका यानी इंदिरा चौक। यहां पर औद्योगिक इकाइयां होने की वजह से प्रदूषण का खतरा बना रहता है। यही वजह है कि पिछले साल एनजीटी द्वारा आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाने से यहां पटाखा बाजार नहीं लगा लेकिन, इस बार पटाखा बाजार को शर्तों के साथ लगाने के आदेश हुए।

सुप्रीम कोर्ट व शासन ने आदेश जारी किया था कि प्रदेश भर में हरित पटाखों की बिक्री होगी। इनसे कम प्रदूषण फैलता है लेकिन, यहां ऐसा नहीं हुआ। यहां पर अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की ब्रिकी धड़ल्ले के साथ हुई। इससे प्रदूषण का ग्राफ बढ़ गया। प्रदूषण विभाग के मुताबिक आम दिनों में औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण की स्थित 125 एक्यूआइ रहती थी जो दिवाली की रात 326 पहुंच गई। ऐसे ही आवासीय क्षेत्र में 110 से गंभीर श्रेणी 422 एक्यूआई तक पहुंच गई। बढ़ा प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। देश व प्रदेश के प्रदूषित शहरों की सूची में भी आ चुका है गजरौला

गजरौला : औद्योगिक नगरी प्रदूषण के लिए सिर्फ जिले में बदनाम नहीं है बल्कि यहां का नाम कई बार सबसे प्रदूषित शहरों के साथ देश व प्रदेश की सूची में भी आ चुका है। इतना ही नहीं एनजीटी की टीम भी यहां कई बार प्रदूषित पानी बाहर फेंके जाने की शिकायतों को लेकर छापेमारी कर चुकी है। वर्ष 2017 में यहां की एक बड़ी इकाई समेत 14 फैक्ट्रियों को एक माह के लिए बंद कराने के आदेश भी हुए थे। प्रदूषण का स्तर 400 एक्यूआई से भी ज्यादा बढ़ने पर गंभीर श्रेणी में पहुंच जाता है। इस बार औद्योगिक क्षेत्र का कम तो आवासीय इलाकों में अधिक पाया गया है। दो-तीन दिन में सबकुछ सामान्य हो जाएगा। प्रदूषण की निगरानी शुरू करा दी गई है।

अनिल शर्मा, सहायक पर्यावरण अभियंता, गजरौला।

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