सरसों के दाम में उछाल से हुई किसानों की बल्ले-बल्ले

जेएनएन अमरोहा सरसों के रेट महंगे होने से किसानों की बाछें खिल गई हैं। हालांकि महं

JagranPublish:Fri, 03 Dec 2021 12:23 AM (IST) Updated:Fri, 03 Dec 2021 12:23 AM (IST)
सरसों के दाम में उछाल से हुई किसानों की बल्ले-बल्ले
सरसों के दाम में उछाल से हुई किसानों की बल्ले-बल्ले

जेएनएन, अमरोहा : सरसों के रेट महंगे होने से किसानों की बाछें खिल गई हैं। हालांकि महंगे रेट का लाभ उन किसानों को ही मिल रहा है, जिन्होंने फसल कटने के दौरान सरसों को सस्ते में बेचने के बजाय स्टाक कर लिया था। इस मुनाफे से उनके अन्य फसलों के नुकसान की भरपाई हो गई है।

गत वर्ष कोरोना संक्रमण काल के चलते प्रतिबंध की वजह से शादी समारोह में भीड़ पर रोक के कारण सरसों के तेल की खपत कम हुई थी। इससे फरवरी में सरसों की फसल आने पर काली सरसों के रेट चार हजार से पांच हजार रुपये क्विंटल तक रहे थे। जबकि सरसों की पैदावार बेहतर हुई थी। जरूरतमंद किसानों ने फसल सस्ते में बेच दी थी, लेकिन साधन संपन्न किसानों ने स्टाक कर लिया था। वर्तमान समय में सरसों के रेट में अचानक उछाल आ गया है। हसनपुर मंडी समिति में इन दिनों काली सरसों सात हजार से 7,600 रुपये प्रति क्विटल बिक रही है।

फसल के समय के सापेक्ष अब एक तिहाई दाम बढ़ने से जिन किसानों के पास सरसों थी उनकी बल्ले-बल्ले हो गई है। जागरूक किसानों का कहना है कि जरूरत को पूरा करने के लिए किसान फसल घर में पहुंचते ही बेच देते हैं। आर्थिक स्थिति सही रहे तो सरसों समेत सभी फसलों का स्टाक करके रेट सही लिया जा सकता है। फसल कटने के समय काली सरसों के रेट करीब पांच हजार रुपये क्विटल थे। जबकि इस समय 7000 से 7600 सौ रुपये क्विटल बिक रही है। रेट में उछाल आने से जिन किसानों के पास सरसों थी उन्हें राहत मिल रही है। फसल का सही रेट मिलना अच्छी बात है।

मनवीर सिंह, किसान पूठ रोड हसनपुर। फसल के समय सरसों का सही रेट न मिलने पर सरसों रोक ली थी अब रेट सही मिल रहा है तो बेचने आ गए हैं। जरूरत को पूरा करने के लिए किसान फसल को आते ही बेच देते हैं। स्टाक कर सही समय पर बेचे तो अच्छा रेट लिया जा सकता है।

उदल सिंह , किसान गांव मकनपुर शुमाली। फरवरी माह में सरसों की फसल पकने के दौरान रेट करीब पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल तक रहे थे। इस समय काली सरसों सात से आठ हजार तक बिक रही है। जिन किसानों ने सरसो रोक ली थी उनकी वास्तव में बल्ले बल्ले हो गई है।

चौधरी नरेंद्र सिंह, प्रांतीय कार्यालय मंत्री भारतीय किसान संघ। फसल कटने के समय के सापेक्ष वर्तमान में वास्तव में सरसों के रेट एक तिहाई बढ़ गए हैं। लेकिन सरसों का महंगा रेट साधन संपन्न एवं बड़े किसानों को मिल रहा है। लघु सीमांत एवं आर्थिक रूप से कमजोर किसान तो फसल को आते ही बेचकर जरूरत को पूरा करते हैं।

देवेंद्र सैनी तहसील अध्यक्ष भाकियू भानू।