अमरोहा में एक करोड़ से अधिक रुपये की धोखाधड़ी कर कलेक्शन एजेंट फरार

अमरोहा में एक करोड़ से अधिक रुपये की धोखाधड़ी कर कलेक्शन एजेंट फरार

नगर के जोया रोड स्थित कुंदननगर में सिडिकेट बैंक की शाखा है। इस शाखा में नगर के बैंक कालोनी निवासी प्रदीप कुमार आठ साल से कलेक्शन एजेंट थे। उन्होंने मंडी समिति के आढ़तियों व्यापारियों मजदूरों के साथ ही शहर के अन्य लोगों के डेली कलेक्शन खाता खुलवाए थे।

JagranWed, 03 Mar 2021 12:54 AM (IST)

अमरोहा, जेएनएन: सिडिकेट बैंक की कुंदन नगर शाखा के डेली कलेक्शन एजेंट पर खाताधारकों के एक करोड़ रुपये से अधिक रुपये लेकर लापता होने का आरोप है। मामला सामने आने पर खाताधारकों ने बैंक जाकर जानकारी की तो उनके खाते में पैसे ही जमा नहीं कराए गए हैं। जबकि एजेंट उन्हें प्रतिदिन की रसीद देता था। यह मामला प्रकाश में आने के बाद खाताधारकों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं बैंक अधिकारी भी इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने से किनारा कर रहे हैं। इतना ही नहीं तीन महीना पहले एजेंट की शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

नगर के जोया रोड स्थित कुंदननगर में सिडिकेट बैंक की शाखा है। इस शाखा में नगर के बैंक कालोनी निवासी प्रदीप कुमार आठ साल से कलेक्शन एजेंट थे। उन्होंने मंडी समिति के आढ़तियों, व्यापारियों, मजदूरों के साथ ही शहर के अन्य लोगों के डेली कलेक्शन खाता खुलवाए थे। वह रोजाना उगाही कर बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई मशीन से उन्हें रसीद निकालकर देते थे। इस बचत खाते में कम से कम एक साल तक के लिए रकम जमा की जाती थी। पहले दो-तीन साल तो खाते कम थे, लेकिन जैसे-जैसे विश्वास बढ़ता गया, वैसे-वैसे खाता धारकों की संख्या सैकड़ों में हो गई। खाताधारक जरूरत पड़ने पर एक साल बाद रुपये निकाल लेते थे। दिसंबर 2020 में मंडी समिति के आढ़ती पवन कुमार अपने एक लाख 36000 रुपये, हिमांशु व गोविद दो लाख रुपये, धर्मपाल दो लाख दो हजार रुपये, अशोक कुमार एक लाख 69 हजार 350, राजेंद्र सिंह 21 हजार 600, चंद्रपाल सिंह 97000 तथा हिमांशु 78 हजार 750 रुपये रुपये निकालने बैंक गए थे। परंतु उनके खाते में जमा किए गए पैसे ही नहीं थे। यानि एजेंट ने उनसे पैसे तो लिए, लेकिन खाते में जमा नहीं कराए। यह देख खाता धारकों ने मैनेजर पल्लव भारद्वाज और अन्य कर्मियों से शिकायत की तो उन्होंने भी खाते में एजेंट द्वारा रुपये जमा नहीं होने की जानकारी दी। बैंक की पक्की रसीदें दिखाई, लेकिन बैंक मैनेजर ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन देकर भेज दिया। मामले की भनक लगने के बाद अन्य धाताधारक भी बैंक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन बैंक कर्मी तीन माह से जांच का आश्वासन देकर उन्हें टरका रहे हैं। जबकि प्रदीप कुमार लापता है। बताते हैं कि वह शहर के लगभग 900 लोगों से प्रतिदिन कलेक्शन करता था। क्या बोले जिम्मेदार

इस संबंध में एजेंट प्रदीप ही बेहतर जानकारी दे सकता है। कुछ लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी। उसकी जांच की जा रही है।

पल्लव भारद्वाज, शाखा प्रबंधक। इस मामले की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो खाताधारक अपनी शिकायत दर्ज कराएं। आरोपितों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी। प्रशांत कुमार एलडीएम।

एजेंट ने भुगतान के नाम पर दिया था फर्जी चेक

मंडी समिति के आढ़ती उदेश कुमार ने बताया कि उनके खाते में दो लाख रुपये थे। जनवरी में एजेंट प्रदीप कुमार को बुलाकर रुपये देने का दबाव बनाया तो उसने दो लाख रुपये का फर्जी चेक काटकर दे दिया। वह चेक बाउंस हो गया। क्या बोले पीड़ित

डेली कलेक्शन खाते में एजेंट के माध्यम से दो लाख रुपये जमा किए थे। मेरे पास पक्की रसीद हैं, लेकिन खाते में रुपये जमा नहीं हैं। बैंक अधिकारी भी रुपये देने से इंकार कर रहे हैं।

धर्मपाल सिंह, आढ़ती।

हम तीन भाइयों ने अपने खातों में चार लाख रुपये जमा किए हैं। रसीदें हमारे पास हैं। बैक से रुपये निकालने पहुंचे तो महज एक लाख 20 हजार रुपये खाते में हैं। बैंक अधिकारी एजेंट द्वारा जमा करने पर ही भुगतान की बात कह रहे हैं।

पवन, आढ़ती। खाते में पैसे जमा कराने के लिए रोजाना रुपये देते थे। रसीद के हिसाब से मेरे खाते में 97 हजार रुपये होने चाहिए थे, लेकिन खाते में 5800 रुपये जमा है। बैंक अधिकारी रुपये नहीं दे रहे है। जांच के नाम पर तीन माह से टरका रहे हैं।

चंद्रपाल, आढ़ती। डेली कलेक्शन खाते में पचास हजार रुपये जमा किए हैं। रुपये निकालने बैंक पहुंचा तो खाते में रुपये नहीं हैं। बैंक अधिकारियों से पूछा तो उन्होंने एजेंट द्वारा रुपये जमा नहीं करने की जानकारी दी। बैंक अधिकारी इसके जिम्मेदार है। उनको भुगतान करना चाहिए।

-ताराचंद, आढ़ती।

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