बढ़ते प्रदूषण से नई इकाईयों पर प्रतिबंध, क्षमता वृद्धि पर भी रोक

जेएनएन अमरोहा प्रदूषण के लिए बदनाम गजरौला में अब नई इकाईयां लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया

JagranFri, 03 Dec 2021 12:22 AM (IST)
बढ़ते प्रदूषण से नई इकाईयों पर प्रतिबंध, क्षमता वृद्धि पर भी रोक

जेएनएन, अमरोहा : प्रदूषण के लिए बदनाम गजरौला में अब नई इकाईयां लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इतना ही नहीं पुरानी फैक्ट्रियों में क्षमता वृद्धि पर भी रोक लगी है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से स्थानीय शहर का नाम देश में प्रदूषण के लिए चर्चित शहरों की सूची में भी शामिल है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार निगरानी का दावा कर रहा है। लेकिन आमजन इन दावों को खोखला बताते हुए प्रदूषण बढ़ने की बात कहते हैं।

जी हां, अभी तक यहां का नाम केमिकल उत्पादन वाली एक बड़ी इकाई के प्रदूषित गैस व पानी को लेकर उभरता था, लेकिन अब दूसरी कंपनी तेवा एपीआइ के टैंक से हुए रिसाव के बाद उसका नाम भी जुड़ गया है। गैस रिसाव व एक मजदूर की मौत के मामले में एनजीटी द्वारा तेवा कंपनी पर दस करोड़ रुपये का जुर्माना भी डाला गया है। इनदिनों शहर में प्रदूषण की मात्रा 150 से 175 एक्यूआइ (एयर क्वालिटी इंडेक्स) है। दीपावली के समय एक्यूआइ तीन सौ के ऊपर पहुंच गया था जो, अब सामान्य हो गया है। प्रदूषण विभाग के सहायक पर्यावरण अभियंता अनिल शर्मा का दावा है कि प्रदूषण की निगरानी के लिए अलग-अलग इकाइयों में आठ पीटीजेड कैमरे लगे हैं। जो, चिमनियों से निकले वाले धुआं को देखते हैं। लगभग दो किमी का एरिया कवर करते हैं। इनके अलावा दो यंत्रों के साथ प्रत्येक कंपनी में प्रदूषण कंट्रोल डिवाइस लगी हैं, जिनके माध्यम से प्रदूषण की निगरानी की जा रही है। उनकी आनलाइन लखनऊ व दिल्ली में देखरेख की जा रही है। गजरौला देश व प्रदेश के प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल

गजरौला : बढ़ते प्रदूषण के चलते गजरौला का नाम भी बड़े प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हो गया है। जनवरी 2020 में जारी सूची में देश के प्रदूषित शहरों में यूपी के जिन शहरों के नाम दिए गए थे। उनमें गजरौला भी शामिल था। यहां पर एनजीटी के आदेश पर 14 इकाइयां एक माह बंद भी रहीं। भले ही विभागीय रिकार्ड में प्रदूषण सामान्य चल रहा हो, लेकिन हकीकत कुछ और है। यहां पर रात के समय पर इकाइयों से प्रदूषित गैस छोड़ी जाती है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आंधी-बारिश के दौरान भी ऐसा होता है। तेवा कंपनी पर दस करोड़ का जुर्माना भी गैस रिसाव के मामले में ही लगाया गया है।

मानसी चाहल, अधिवक्ता, गजरौला फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को बगद नदी में डाला जा रहा है। इसकी वजह से नदी का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म सा हो गया है। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही है। मनुष्य के साथ जानवरों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ झूठे दावे किए जाते हैं।

चौधरी दिवाकर सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाकियू भानू गजरौला की इकाइयों की वजह से आसपास के इलाकों की हवा भी दूषित हो चुकी है। बगद नदी अपने अस्तित्व की जंग जड़ रही है। उसमें प्रदूषित पानी छोड़ा जाता है। खेती पर बुूरा प्रभाव पड़ रहा है। हसनपुर क्षेत्र में भी बगद नदी के किनारे पर बसे गांवों में हैंडपंपों से पीला पानी निकलता है। इसकी शिकायत भी की जा चुकी है।

मुजाहिद चौधरी, पर्यावरण एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता। गजरौला में भी प्रदूषण का ग्राफ बढ़ा हुआ है, जितनी पर्यावरणीय चिता कार्यक्रमों में व्यक्त की जाती है उसके सापेक्ष धरातल पर बहुत कम होता है। जमीनी स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण हित मे कार्य करने की आवश्यकता है तभी प्रदूषण में कमी ला सकते हैं।

संजीव पाल, राष्ट्रीय सचिव, पर्यावरण सचेतक समिति।

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