हरियाली पर कुल्हाड़ी, पत्तियों से दहक रहीं इकाइयों की भट्ठियां

गजरौला हस्तिनापुर वन सेंचुरी क्षेत्र में हरियाली पर कुल्हाड़ी चल रही है।

JagranSat, 09 Oct 2021 11:49 PM (IST)
हरियाली पर कुल्हाड़ी, पत्तियों से दहक रहीं इकाइयों की भट्ठियां

गजरौला : हस्तिनापुर वन सेंचुरी क्षेत्र में हरियाली पर कुल्हाड़ी चल रही है। वन अधिकारियों की मिलीभगत से हरे भरे पेड़ों की पत्तियां झाड़कर उन्हें सप्लाई किया जा रहा है। इनसे औद्योगिक नगरी की कई इकाइयां के प्लांट में लगी भट्ठियां दहक रहीं हैं।

हस्तिनापुर वन सेंचुरी दो हजार 73 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है जो, बिजनौर, अमरोहा, मेरठ, गाजियाबाद समेत कई जनपद की सीमा इसमें शामिल हैं। इसमें वन अधिकारियों की मिलीभगत से पत्तियों को बेचने का काम किया जा रहा है। वहां से यह पत्तियां ट्राली में भरकर कोल्हू, पेपरमिल, दूध प्लांट, खाद बनाने की फैक्ट्रियों में सप्लाई की जाती हैं। ऐसे ही गजरौला में हसनपुर मार्ग पर स्थित फैक्ट्री में यह पत्तियां पहुंचाई जा रही हैं।

खास बात है कि पत्तियों से भरी ट्राली यूं ही सड़क पर चलकर इकाइयों तक पहुंच रही हैं। इसके बाद भी वन विभाग के अधिकारियों का चाबुक इन पर नहीं चलता है। इस धंधे से न सिर्फ पर्यावरण खतरे में है बल्कि धंधेबाजों को मोटा मुनाफा भी हो रहा है। अक्तूबर से मार्च माह तक जोर पकड़ता है धंधा

गजरौला : जानकार बताते हैं कि वनों में हरे-भरे पेड़ों से पत्तियां झाड़कर इकाइयों में सप्लाई करने का धंधा अक्तूबर से मार्च महीने तक अधिक जोर पकड़ता है। चूंकि सर्दी के सीजन में कोल्हू, प्लांट व दूध की पूर्ति अधिक होने से फैक्ट्रियों में भी उत्पादन बढ़ जाता है। इसलिए अधिक मात्रा में आग जलती है। इसलिए पत्तियों का धंधा बढ़ता है। गांवों में लगे हैं पत्तियां काटने के कटर

गजरौला : वन क्षेत्र के पेड़ों से पत्तियों को झाड़कर उनकी कुट्टी काटने के लिए लोगों ने कटर मशीन भी लगा रखी हैं। मंडी धनौरा, बछरायूं, सुजमना व चांदपुर क्षेत्र में कई जगह पर कटर मशीन लगी हैं। जहां पर यह पत्तियां कटने के बाद सप्लाई होती हैं। ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है अगर, ऐसा है तो बिल्कुल गलत हो रहा है। इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई भी होगी।

देवमणि मिश्रा, डीएफओ, अमरोहा। हस्तिनापुर वन सेंचुरी क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की पत्तियां काटने का धंधा काफी समय से चल रहा है। इस संबंध में कई बार मांग भी उठाई हैं लेकिन, वन अधिकारियों का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। यह धंधा यहां पर ही नहीं बल्कि चांदपुर-बिजनौर में भी चल रहा है।

रविद्र शुक्ला, जिलाध्यक्ष, पीएफए, अमरोहा।

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