स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर लटक रहे ताले,भटक रहे मरीज

महज कागजी खानापूरी कर ग्रामीणों का स्वास्थ्य सुधारने का दावा किया जा रहा है।

JagranPublish:Mon, 07 Dec 2020 11:53 PM (IST) Updated:Mon, 07 Dec 2020 11:53 PM (IST)
स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर लटक रहे ताले,भटक रहे मरीज
स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर लटक रहे ताले,भटक रहे मरीज

अमेठी: स्वास्थ्य सुविधाएं किस कदर बदहाल हैं। इसकी हकीकत से रूबरू होना है, तो आइए विकास खंड सिंहपुर। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का ढिढोरा पीटने वाले महकमें की हालत बद से बदतर है। यहां विभागीय जिम्मेदार ही शासन की योजनाओं पर पानी फेर रहे हैं। महज कागजी खानापूर्ति कर ग्रामीणों का स्वास्थ्य सुधारने का दावा किया जा रहा है।

सरकार द्वारा गांवों में परिवार कल्याण उपकेंद्र की स्थापना की है। जिससे गर्भवती महिलाओं की देखभाल, प्रसव व टीकाकरण का कार्य स्थानीय स्तर पर सुगमता पूर्वक हो सके। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाह कार्यशैली के चलते ये योजनाएं महज सपना बनकर रह गईं हैं। हाल यह है कि महिला मरीजों की देखभाल तो दूर उपकेंद्रों पर एएनएम रात्रि निवास भी नहीं करती। जिसके चलते क्षेत्र के सभी 26 एएनएम सेंटरों पर ताला लटक रहा है। सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति पेंडारा गांव स्थित उपकेंद्र की है। बदहाली की कगार पर पहुंच चुके इस केंद्र पर ग्रामीणों का कब्जा है।

-इन गांवों में हैं उपकेंद्र

ब्लॉक के 26 गांवों में एएनएम सेंटर बनाए गए हैं। इनमें खानापुर चपरा, बहुआ,करनगांव, फत्तेपुर, फूला, रस्तामऊ, आजादपुर,इन्हौना,सढिया, चिलौली,कोटवा,लौली,खरावा,जगतपुर, कुकहारामपुर, पेंडारा, खारा,भानीपुर,सातनपुरवा, शिवरतनगंज, रामपुर पवारा,रतवलिया,महेशपुर,पंहौना,सिंहपुर शामिल हैं।

-24 एएनएम की है तैनाती

क्षेत्र के उपकेंद्रों पर 24 एएनएम की तैनाती की गई है। वहीं जगतपुर व कुकहारामपुर उपकेंद्र पर नर्स की तैनाती न होने से हेल्थ विजिटर्स के सहारे संचालित होने का दावा किया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि इन उपकेंद्रों में भी लंबे अरसे से ताले लटक रहे हैं।

-ग्रामीणों की जुबानी

संजीव बाजपेई कहते हैं कि गांवों में कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं दी जा रही है। संबंधित विभाग सिर्फ कागजों पर लोगों का इलाज कर रहा है। नीरज शुक्ल बताते हैं कि कई उपकेंद्र देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुके हैं। जिन्हें देखने वाला कोई नहीं है। नरसिंह बहादुर का कहना है कि उपकेंद्रों पर एएनएम के कभी दर्शन ही नहीं होते। राहुल पाठक कहते हैं कि किसी भी सेंटर पर एएनएम रात्रि निवास नहीं करती हैं। जिससे अकस्मात बीमार हुई महिलाओं को लेकर बाहर भागना पड़ता है।

कुछ संसाधनों का अभाव जरूर है,लेकिन एएनएम को अपने सेंटर पर रहना चाहिए। उपकेंद्र पर ताले क्यों लटक रहे हैं। इसकी जानकारी की जाएगी। डॉ. आशुतोष दुबे,सीएमओ