शुद्ध पेयजल के साधन कुओं के वजूद पर खतरा

अंबेडकरनगर : कस्बे के ईश्वरनगर मोहल्ला सिर्फ नाम का ही ईश्वरनगर रह गया है। यहां पर तो अतिक्रमणकर्ताओं ने पेयजल के लिए बने कुओं को भी नहीं छोड़ा। मोहल्ले में करीब 30-35 साल पहले कुएं में चरखी चलती थी और लोगों के पीने के पानी का एकमात्र साधन था। मोहल्लेवासी स्कूल को लाला का कुमार के नाम से जानते थे। अब इसे कूड़ा करकट डाल कर पाट दिया गया है। यह कुआं अब अपना वजूद खोने के कगार पर है। इल्ति़फातगंज कस्बे के 11 वार्डों को मिलाकर करीब आधा दर्जन कुएं हैं। कमोवेश सभी यही हाल है। कस्बा निवासी राजेंद्र प्रसाद, पूर्व सभासद रामकृष्ण, धर्मप्रकाश चौरसिया, शिव सहाय, गोपाल, मोतीलाल, रामनिवास आदि ने बताया नगर पंचायत से इनके वजूद को बचाने के लिए कोई सक्रिय पहल नहीं किया गया। नगर पंचायत को चाहिए इन पेयजल की धरोहर कुओं की सुंदरीकरण कराकर बचाए। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि निजाम अहमद ने बताया कुआं नगर पंचायत के अभिलेखों में दर्ज नहीं है। इसे पाटने की कोई शिकायत भी नहीं है।

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