राम के गले में वरमाला डालते ही फूलों की बारिश

टांडा के महरीपुर गांव में नवयुवक रामलीला समिति द्वारा किए जा रहे मंचन में दर्शकों का तांता लगा।

JagranFri, 22 Oct 2021 09:52 PM (IST)
राम के गले में वरमाला डालते ही फूलों की बारिश

अंबेडकरनगर: टांडा के महरीपुर गांव में नवयुवक रामलीला समिति द्वारा किए जा रहे मंचन के चौथे दिन कलाकारों ने सीता स्वयंवर व परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन किया। भगवान राम के धनुष तोड़ने पर जनकनंदिनी सीता राम के गले में वरमाला डाल उनका वरण करतीं हैं। दर्शकों ने राम और सीता पर फूलों की वर्षा करते हुए जयकारे लगाए। परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए तीखे संवाद का भी लोगों ने खूब आनंद लिया।

समिति अध्यक्ष सुभाष चंद्र कश्यप की अगुवाई में किए जा रहे मंचन में कलाकारों ने प्रथम ²श्य में दिखाया कि राजा जनक अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप स्वयंवर रखते हैं, इसमें देश भर के राजा, महाराजा, राजकुमार और योद्धा शामिल होते हैं। स्वयंवर में पहुंचे राजाओं को धनुष उठाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। सभी शिव धनुष को उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन वे इसे हिला तक नहीं सके। यह देख राजा जनक सभी राजाओं की वीरता पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। इसे सुन लक्ष्मण क्रोधित हो उठते हैं। महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से राम धनुष उठा कर जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ाते हैं, धनुष टूट जाता है। राम के गले में सीता के वरमाला डालते ही भक्तों ने फूलों की वर्षा की। दर्शकों ने जय श्रीराम के उदघोष से पूरा माहौल भक्तिमय बना दिया। शिव धनुष टूटने से क्रोधित परशुराम और लक्ष्मण के मध्य तीखे संवाद का भी लीलाप्रेमियों ने खूब आनंद लिया। इस दौरान बृजेश मांझी सहित पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

महरुआ : सिलावट गांव में चल रही रामलीला के चौथे दिन सीताहरण व सूर्पणखा की नाक काटने का मंचन किया गया। पंचवटी में सूर्पणखा राम लक्ष्मण को लुभाती हैं। लक्ष्मण क्रोधित होकर उसकी नाक काट देते हैं। वह अपने भाइयों खर, दूषण के युद्ध में मारे जाने पर रावण को अपनी व्यथा सुनाती है और सीताहरण करने के लिए उकसाती है। रावण मारीच की मदद से षड्यंत्र रचता है और मां सीता का हरण कर लेता है। रास्ते में जटायु उसे रोकता है, लेकिन रावण उसे घायल कर लंका की ओर आगे बढ़ जाता है।

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