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पौधा लगाकर मुंह मोड़ने नहीं नाता जोड़ने का आया वक्त

अंबेडकरनगर : पौधारोपण का उत्साह चंद दिनों चलकर सालभर के लिए खामोश पड़ जाता है। ऐसे में पौधा लगाकर मुंह मोड़ने के बजाए इससे नाता जोड़ने की जरूरत है। हरियाली की उम्मीदों को परवान चढ़ाने वाले पौधे बगैर देखभाल के दम तोड़ देते हैं। मौसम की प्रतिकूलता और देखभाल के अभाव में पौधे नष्ट हो जाते हैं। आंकड़ों में वन विभाग से रोपित करीब 10 से 12 फीसद व विभिन्न विभागों से रोपित 50 से 60 फीसद पौधे नष्ट हो जाते हैं।

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पौधारोपण में विसंगतियां : वानिकी बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित कर पौधारोपण करते समय स्थान व सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। सड़कों और ऊसर में रोपित पौधों की नियमित देखभाल कठिन होती है। पौधों की सिचाई, दीमक आदि रोक लगना, मवेशियों से बचाने आदि इंतजाम नहीं नजर आते। वन विभाग अपने पौधों की देखभाल करता है, लेकिन बाकी विभाग पौधा लगाकर वापस झांकने नहीं जाते। लक्ष्य थोपने के बजाए जरूरतमंदों और इच्छुक लोगों को पौधा देना चाहिए। जबकि नर्सरी से लक्ष्य के अनुसार सिर्फ आवंटियों को पौधा दिया जाता है।

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एक वृक्ष दस पुत्र समान के महत्व को समझना होगा। पेड़-पौधे प्रत्येक दशा में गुणकारी होते हैं, बस हमें इनके बारे में संपूर्ण जानकारी नहीं होती। मुनाफे के बजाए विविध पौधे लगाने व बचाने पर बल देना चाहिए। पेड़ काटना दंडनीय है, लेकिन नर्सरी से हरे-भरे पौधे को निकाल कर रोपित करने के बाद नष्ट होने पर जिम्मेदारी तय करते हुए सजा मिलनी चाहिए।

विनोद कुमार सिंह, प्रवक्ता, वनस्पति विज्ञान

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रोपित पौधों की सुरक्षा का पूरा ध्यान दिया जाता है। ब्रिकगार्ड, तार के बाड़ तथा निगरानी के लिए कर्मियों को तैनात किया गया है। पौधों के नष्ट होने पर वहां दोबारा रोपित कराया जाता है।

टीएन सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी

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