घाघरा नदी का जलस्तर स्थिर, तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ी

घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच खतरे के लाल निशान 92.730 मीटर ऊपर की ओर स्थिर हो गया।

JagranMon, 21 Jun 2021 10:36 PM (IST)
घाघरा नदी का जलस्तर स्थिर, तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ी

अंबेडकरनगर : घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच खतरे के लाल निशान 92.730 मीटर से 18 सेंटीमीटर नीचे पहुंचकर नदी स्थिर हो गई है। रविवार तक नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से मांझा क्षेत्र के ग्रामीण काफी चितित थे, लेकिन अब बारिश थमने से घाघरा का पानी स्थिर होने पर राहत की सांस ली है।

घाघरा में प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ के साथ ही कटान की विभीषिका में टांडा तहसील के उल्टहवा मांझा, मांझा कला, मांझा चितौरा, केवटला, नसरूल्लापुर, अवसानपुर, नैपुरा, सलोना घाट, ढेलमऊ, डुहिया समेत दर्जनों गांव आते हैं। नगर के नेहरूनगर, मेहनियां, अलीगंज उत्तरी आदि मुहल्लों के लोगों को भी इससे दो-चार होना पड़ता है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता एसके प्रसाद ने बताया कि घाघरा नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे से स्थिर है। जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। उपजिलाधिकारी अभिषेक पाठक ने बताया कि अभी कहीं खतरा नहीं है। प्रभावित होने वाले गांवों का निरीक्षण कर बाढ़ से निपटने के लिए हरसंभव तैयारियां की जा रही हैं।

-कटान रोकने के इंतजाम शुरू: टांडा नगर से सटे चितौरा ग्राम पंचायत के केवटहियां में नदी के किनारे हो रहे कटान को रोकने के प्रबंध शुरू हो गए हैं। केवटहिया में एक दर्जन से अधिक परिवार रहते हैं। इसी के समीप अंत्येष्टि स्थल भी है। बाढ़ से अंत्येष्टि स्थल तक जाने वाला रास्ता पहले ही कटान के चलते लोगों की दुश्वारियां बढ़ा रहा है। बारिश से घाघरा तट की मिट्टी नम होने से लगभग दो मीटर से अधिक कटान कर नदी में समा चुकी है। यहां हुए कटान से समीप में रहने वालों में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासी संतोष निषाद, श्रीराम निषाद, राम आसरे निषाद आदि ने बताया कि लोग यहां अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने पहुंचते हैं। गत दिनों कटान रोकने की व्यवस्था कराने की मांग की गई थी। सोमवार को यहां कटान रोकने को बोल्डर बनाने का काम शुरू हुआ है, इससे लोगों ने राहत महसूस की है।

-बारिश से कच्चा मकान गिरा

सम्मनपुर : जलालपुर तहसील के ब्राहिमपुर गांव निवासी घनश्याम का कच्चा मकान बीती रात बारिश के कारण गिर गया। घनश्याम का परिवार बचे हुए एक टिनशेड के नीचे गुजर-बसर कर रहा है। उन्हें सरकार से आवास का लाभ नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से अहेतुक मदद की मांग की है।

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