रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए भेजा डिमांड, चिकित्सालय की ओपीडी भी आधी

रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए भेजा डिमांड, चिकित्सालय की ओपीडी भी आधी

कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी चपेट में आने वालों की संख्या ने पिछले वर्ष का रिकार्ड भी तोड़ दिया है। बड़े शहरों की स्थितियां सुन सभी घबराए हैं। निजी चिकित्सक मरीजों का इलाज करने से कतराने लगे हैं।

JagranThu, 15 Apr 2021 11:11 PM (IST)

अंबेडकरनगर: कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी चपेट में आने वालों की संख्या ने पिछले वर्ष का रिकार्ड भी तोड़ दिया है। बड़े शहरों की स्थितियां सुन सभी घबराए हैं। निजी चिकित्सक मरीजों का इलाज करने से कतराने लगे हैं। ऐसे में लोगों के समक्ष भारी समस्याएं आ खड़ी हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग भी अधिक से अधिक संक्रमितों का इलाज होम आइसोलेशन में करने का प्रयास कर रहा है। ऑक्सीजन सिलिडर लगने के बाद स्थिति खराब होने पर संक्रमितों को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। कोरोना संक्रमितों के इलाज में यह इंजेक्शन बेहद कारगर माना जा रहा है। वर्तमान समय में यह इंजेक्शन सिर्फ राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर टांडा में ही उपलब्ध है। यहां सात संक्रमित ऑक्सीजन पर रखे गए हैं।

संक्रमित मरीजों को समय पर इलाज मुहैया हो सके, इसके लिए जिलाधिकारी रोजाना समीक्षा कर सीएमओ, नोडल और चिकित्साधिकारियों को दिशा-निर्देश दे रहे हैं, फिर भी व्यवस्था बेहतर संचालित नहीं हो पा रही है। जिला चिकित्सालय में जांच के लिए भी लोगों को सिफारिश लगानी पड़ रही है, जबकि अधिक से अधिक जांच कराने के लिए शासन-प्रशासन का पूरा प्रयास है। ओपीडी की संख्या भी कम हो रही है तो वहीं इमरजेंसी विग के तीसरे वार्ड को दो दिन के लिए बंद कर दिया गया है।

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जिला चिकित्सालय में आधी हो गई ओपीडी : कोरोना संकटकाल में जिला चिकित्सालय की ओपीडी भी 50 फीसद हो गई है। संक्रमण की दूसरी लहर से पहले जहां 1400 से 1500 मरीजों की ओपीडी होती थी, वहीं गुरुवार को महज 708 की ओपीडी रही। सीएमएस डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि कोरोना से लोगों में डर होने के साथ अप्रैल में गेहूं की कटाई भी होती है, इसलिए संख्या कम हो जाती है। वहीं मेडिकल कॉलेज टांडा में सात संक्रमित ऑक्सीजन पर सांस ले रहे हैं। साथ ही यहां 15 मरीज वार्ड में और 22 संक्रमित टांडा के एल-टू हॉस्पिटल में भर्ती किए गए हैं।

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कोरोना संक्रमितों का इलाज किया जा रहा है। रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए शासन को डिमांड भेजी गई है। जांच तीनों प्रकार से की जा रही है। सबसे अधिक एंटीजेन और आरटीपीसीआर के जरिए की जा रही है।

डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ

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