बाइक चालकों ने सख्त नियमों को बनाया मजाक

अंबेडकरनगर : यातायात नियमों का माखौल तो वैसे भारी वाहनों से लेकर टैक्सी और निजी कार चालक भी उड़ाते हैं। इसमें सबसे अधिक मनमानी बाइक चालक करते हैं। शहर से लेकर गांव तक आप बाइक चालकों को सख्त यातायात नियमों को मजाक बनाते देख सकते हैं। हद से जिला मुख्यालय के जागरूक चालक करते हैं। तीन से पांच सवारियों को बाइक पर बैठाने से गुरेज नहीं करते। खास बात है कि इसमें सबसे ज्यादा जोखिम बच्चों को लेकर उठाया जाता है। शुक्रवार को भी ऐसे ही कुछ नजारे हैरान करने वाले रहे। पुरानी तहसील तिराहे पर चंद मिनट रुकने के दौरान जागरण टीम के कैमरे में यह तस्वीरें कैद हुईं। तिराहे पर तैनात दर्जनों पुलिस कर्मी आपस में मशगूल रहे और सड़क पर यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खतरों को दावत देकर चालक सफर करते रहे।

दृश्य एक : बाइक सवार इस जागरूक चालक को गौर से देखिए इन्हें खुद के सुरक्षा की फिक्र तो खूब है, लेकिन छोटे-छोटे बच्चों और महिला की जान को जोखिम में डाल दिया है। चालक ने खुद हेलमेट पहना है, लेकिन बेटे को बाइक की टंकी पर तथा दूसरे बेटे को पीछे बैठाया है। इसके बाद कुछ जगह बनाकर महिला को भी बैठा लिया। खैर आपका परिवार और आपकी जिदगी जैसे इच्छा करे जोखिम उठाइए। बस सिस्टम को दोष मत देना, यह खामोश है।

दृश्य दो : बाइक पर सवार दोनों पुरुषों को देखिए बीच में बैठी महिला शायद मरीज है। जान बचाने के खातिर उपचार को लाए होंगे। ऐसे में सफर में ही उसकी जान को जोखिम में डाल दिया। इलाज से पहले हादसा होने पर मुसीबत और बढ़ सकती है। मजबूरी में कम से कम हेलमेट तो लगा ही सकते थे।

दृश्य तीन : इन जनाब को देखिए पुरानी तहसील पर पुलिस कर्मियों के सामने से बाइक पर चार लोग सवार होगा बगैर खौफ के फर्राटा भरते निकल गए। माना कि आपको यातायात नियमों से कोई लेनादेना नहीं, लेकिन हेलमेट लगाकर दो लोग ही बैठते तो सफर सुरक्षित रहता है। बच्चे को जोखिम उठाने के लिए आगे कर लिया। पीछे बैठी महिलाओं को भी सोचना चाहिए कि जगह नहीं तो खतरे में सफर टैक्सी वाहन से कर लेतीं।

दृश्य चार : तहसील तिराहे से गुजर रहे इस मालवाहक वाहन को देखिए। इसमें भीतर चालक समेत जितने लोग भरे जा सकते थे, बैठा लिए गए। इसके बाद तीन लोग वाहन की छत पर बैठ गए। इन्हें कानून का डर तो नहीं ही लगता लेकिन कौन समझाए लटकते बिजली के तार हादसे का बड़ा सबब बन सकते हैं। वहीं हल्का झटका लगने के बाद जान जोखिम में पड़ सकती है। पुलिस कर्मियों को यह मनमानी नहीं दिखना भी उनकी कार्यशैली पर सवाल बनी है।

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