ग्राम प्रधानों को परफारमेंस ग्रांट की दरकार, 2016 में चयन के बाद से प्रतापगढ़ में नहीं मिला है पैसा

पांच साल से एक भी ग्राम पंचायत को ग्रांट नहीं मिला। डीपीआरओ रवि शंकर द्विवेदी ने बताया कि ग्रांट देना न देना शासन तय करता है। हम लोगों से जिन गांवों को ब्योरा मांगा जाता है उसे उपलब्ध करा दिया जाता है।

Ankur TripathiMon, 02 Aug 2021 06:30 AM (IST)
गांव की आबादी का पांच गुना मिलता है पैसा, 05 साल से एक भी ग्राम पंचायत को ग्रांट नहीं मिला

प्रतापगढ़, जागरण संवाददाता। जनपद की ऐसी ग्राम पंचायतें जो आय कर रहीं हो, उनको हर साल शासन की ओर से परफारमेंस ग्रांट दिया जाना चाहिए। पिछले पांच सालों से एक भी ग्राम पंचायतों को ग्रांट नहीं मिला। ग्राम पंचायतों में बेहतर कार्य कराने वाले व आय करने वाली ग्राम पंचायतों के प्रधान ग्रांट के लिए विकास भवन का चक्कर लगा रहे हैं। जबकि जनपद में तमाम ऐसे गांव हैं, जहां मनरेगा, केंद्रीय वित्त आदि से बेहतर कार्य कराए गए हैं। पंचायत भवन आदि भी खूबसूरत बनाए गए हैं।

जनपद में 17 ब्लाक हैं। इसके तहत सदर, मानधाता, गौरा, बिहार, पट्टी, आसपुर देवसरा, मंगरौरा, बाबा बेलखरनाथ, बिहार, कुंडा, कालाकांकर, लालगंज, रामपुर संग्रामगढ़, लक्ष्मणपुर सहित अन्य ब्लाक हैं। जिले में एक हजार 193 ग्राम पंचायतें हैं। जिले में ऐसी ग्राम पंचायतें जहां शौचालय, पंचायत भवन, स्वच्छता आदि पर बेहतर काम हुए हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायतें आय भी कर रहीं हो। ऐसे करीब दर्जन भर गांव को शासन की ओर से परफारमेंस ग्रांट दिए जाने का निर्देश है। पांच साल से एक भी ग्राम पंचायत को ग्रांट नहीं मिला। डीपीआरओ रवि शंकर द्विवेदी ने बताया कि ग्रांट देना न देना शासन तय करता है। हम लोगों से जिन गांवों को ब्योरा मांगा जाता है, उसे उपलब्ध करा दिया जाता है।

पांच गुना मिलता है ग्रांट

गांव की जितनी आबादी होगी, उसका पांच गुना ग्रांट ग्राम पंचायत को मिलता है। मिले ग्रांट से प्रधान व सचिव इंटरलाकिंग, खड़ंजा, सीसी रोड, हैंडपंप मरम्मत, लाइट लगाने आदि में पैसा खर्च किया जाता है। पांच साल से ग्रांट न मिलने से कई प्रधान मायूस हैं। मानक पूरा होने के बाद भी ग्रांट न मिलने से प्रधान तनाव में हैं।

छह ग्राम पंचायतों का हुआ था चयन

वर्ष 2016 में जिले की छह ग्राम पंचायतें परफारमेंस ग्रांट में चयनित हुईं थी, लेकिन उनको शासन की ओर से बजट नहीं मिला। जबकि ग्राम पंचायतों ने कोरम पूरा किया था। यहां से ब्योरा शासन में भेजा गया, लेकिन अभी तक वहां से कोई ग्रांट नहीं मिला। अब तो ग्राम प्रधान ग्रांट पाले की उम्मीद छोड़ चुके हैं।

परफारमेंस ग्रांट में हुआ था फर्जीवाड़ा

सात साल पहले परफारमेंस ग्रांट पाने के लिए कुंडा व बिहार की कुछ ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों ने फर्जी तरीके से ग्रांट मंगा लिया था। लखनऊ के बैंक अफसर ने दस्तावेज में फर्जी हस्ताक्षर देखा तो उसे शक हुआ। जांच हुई तो पता चला कि ग्राम प्रधानों ने फर्जीवाड़ा किया है। मामला लखनऊ के एक थाने में दर्ज हुआ। गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज किया गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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