UP Parishadiya School: परिषदीय स्‍कूलों के गुरुजी मुश्किल में फंसे, बच्‍चों को पढ़ाएं या डीबीटी का डाटा फीड करें

UP Parishadiya School परिषदीय स्‍कूलों के शिक्षकों का कहना है कि डाटा फीडिंग का कार्य लिपिकीय संवर्ग का है। शिक्षकों से नहीं कराया जाना चाहिए। यदि शासन स्तर से इस कार्य को कराने का निर्देश है तो उसके लिए प्रशिक्षण और संसाधन भी मुहैया कराने की जरूरत है।

Brijesh SrivastavaTue, 19 Oct 2021 08:31 AM (IST)
परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को अध्यापन संग विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों का डाटा फीड करना होगा।

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। यूपी परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को अध्यापन के साथ विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों का डाटा फीड करने की भी जिम्मेदारी दी गई है। उनका बैंक एकाउंट आधार कार्ड से लिंक है या नहीं इसकी जानकारी कर खाते को बैंक से भी लिंक कराना है। तमाम अध्यापक तो ऐसे भी हैं, जिन्‍हें न एंड्राएड फोन चलाना आता है न ही कंप्‍यूटर व लैपटाप ही आपरेट कर सकते हैं। ऐसे में डाटाफीडिंग टेढ़ी खीर साबित हो रही है। इससे स्कूल में अध्यापन कार्य भी प्रभावित हो रहा है। इसे लेकर शिक्षकों में असंतोष है।

परिषदीय शिक्षकों ने प्रशिक्षण व संसाधन मुहैया कराने की जरूरत बताई

परिषदीय स्‍कूलों के शिक्षकों का कहना है कि डाटा फीडिंग का कार्य लिपिकीय संवर्ग का है। शिक्षकों से नहीं कराया जाना चाहिए। यदि शासन स्तर से इस कार्य को कराने का निर्देश है तो उसके लिए प्रशिक्षण और संसाधन भी मुहैया कराने की जरूरत है। अब तक इस संबंध में कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।

शिक्षकों को विद्यालय अवधि में बैंक जाने की अनुमति नहीं

उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के महामंत्री सत्य प्रकाश मिश्र का कहना है कि अध्यापकों की समस्याओं को लेकर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हर तरफ मनमानी की जा रही है। डीबीटी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अधिकांश स्कूलों से एसबीआइ की शाखा बहुत दूर है। पूर्व के निर्देशों में कहा गया है कि कोई भी शिक्षक बैक स्कूल के समय में नहीं जाएगा। दो बजे तक स्कूल में रहने के बाद बैंक पहुंचकर वहां का काम निपटाना संभव नहीं है। ऐसे में डीबीटी का काम प्रभावित होगा।

शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य न लिया जाए : शिक्षक नेता ब्रजेंद्र

संगठन के शिक्षक नेता ब्रजेंद्र का कहना है कि यह भी कहा जा चुका है कि किसी भी शिक्षक से गैर शैक्षणिक कार्य न लिया जाए। डाटा फीडिंग भी गैर शैक्षणिक कार्य है। क्या डाटा फीडिंग को शैक्षणिक कार्य की श्रेणी में या अध्यापक के कार्यों में शामिल किया जा रहा है। इसका जवाब किसी भी हाल में सकारात्मक नहीं हो सकता।

शिक्षकों की संख्या कम होना भी मुसीबत

तमाम स्कूलों में एक या दो शिक्षक हैं। वहां डाटा फीडिंग बड़ी मुश्किल है। खास बात यह कि कुछ विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या काफी है। इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई है। शिक्षकों का कहना है कि आखिर इतने महत्वपूर्ण कार्य को सिर्फ शिक्षकों के भरोसे क्यों थोपा जा रहा है।

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