UP Panchayat Chunav 2021: खेत-खलिहान और पेड़ की छांव में कौशांबी जिले में बिछ रही चुनावी बिसात

खेत-खलिहान हो या फिर किसी बाग में पेड़ के छांव के नीचे, हर जगह चुनावी चर्चा खूब गरमा रही है।

चुनाव भले ही गांव का हो लेकिन सियासत में सबके अनुभव राष्ट्रीय स्तर से कम नहीं हैं। खेत-खलिहान हो या फिर किसी बाग में पेड़ के छांव के नीचे हर जगह चुनावी चर्चा खूब गरमा रही है। इस चुनावी गर्मी में गुड़ की मिठास का स्वाद लेते हुए एक रिपोर्ट।

Rajneesh MishraThu, 15 Apr 2021 05:35 PM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। दोआबा कहलाने वाले गंगा-यमुना के बीच यूपी के कौशांबी जनपद में चुनावी यज्ञ भले ही 29 अप्रैल को हो, लेकिन गांव में सियासत की आग लग चुकी है। इसमें गांव के बड़े-बुजुर्ग के अलावा युवा वर्ग इस समय अपनी रोटियां सेंकने में लगे हैं। यदि बात करें कड़ा ब्लाक क्षेत्र के शहजादपुर गांव की तो यहां मतदाता 6322 हैं। इसी तरह क्षेत्र के ही हिसामपुर परसखी में 2627 और अंदावां ग्राम पंचायत में 3259 वोटर हैं। इन मतदाताओं के बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं जो खुद को किसी चाणक्य से कम नहीं समझते। बड़े-बुजुर्ग सभी ने अपनी गोट बिछानी शुरू कर दी है। चुनाव भले ही गांव का हो, लेकिन सियासत में सबके अनुभव राष्ट्रीय स्तर से कम नहीं हैं। खेत-खलिहान हो या फिर किसी बाग में पेड़ के छांव के नीचे, हर जगह चुनावी चर्चा खूब गरमा रही है। इस चुनावी गर्मी में गुड़ की मिठास का स्वाद लेते हुए एक रिपोर्ट।

पेड़ की छांव में बैठै लोग चर्चा में मशगूल

गुरुवार की सुबह के आठ बजे रहे थे...कुछ लोग गांव में पेड़ की छांव में बैठे थे तो चार-पांच लोग बाग में मौजूद खलिहान में चुनावी सरगर्मी की चर्चा कर रहे थे। बातचीत से ऐसा लग रहा था मानो इस बार गांव के मतदाता चुनाव में गांव को रंगने के लिए अलग ही बिसात बिछाएंगे। एक जगह खेत मे गेंहू काटते हुए कुछ अनुभवी किसानों का जिनका जायजा लिया हमने। जो खेत में फसल काटने के साथ-साथ पेड़ की छांव मे चुनावी चौपाल लगाए हुए थे।

अबकी गूंगन के सरकार न चाही

अचानक एक आवाज सुनाई पड़ी...का बात करते हो जितेंद्र, चौंधिया गए हो का महेशवा के चक्कर मे न परो ऊ तो बिन पेंदी का लोटा है। कभो इधर ढनगत है कभो उधर। ऐसा कहकर देवनाथ घुड़के जितेंद्र को बड़ी जोर से। तुमका कुछो पता है भी न ओका एगो लेटर लिखब आवत है और न बोलब। अब गूंगन के सरकार न चाही हमका। जउन बात है तउन साफ, बताये दे रहे हैं। तभी गुड़ खाकर पानी पीते समय चौंकते हुए बोल पड़े सुरेश भइया... का बात कर रहे को काका, हमका न पता रहा फिर बताओ केका अबकी जितावा जाए। जेका आप सब लोगन कहें वही के पकड़ा जाए। वो कुछ आगे कह पाता, इसके पहले ही नारायण बोला, देखो हम तो बताये देवत हैं जे आदमी के बोले चाले के सहूर होए। छोट बड़ा आदमी के संघे बैठ सके, आपन बात बताई सके, वही के हम तो समझत हैं वोट देवे लायक। इस बीच देवनाथ तपाक से बोले पड़े...बहुत हो गया जात पात की बात। अब हम सबका अपना गांव का आगे लेके जाए का है।

जउन आपन जेब भरी ओका न देबे भूंजी भांग

अइसन परधान न चाही के जनता के सब पैसा अपना घर सजाए म लगावे। अब शायद जितेंद्र को कुछ समझ में आया। जितेंद्र बोले, चाचा हमका कुछ समझ म नही आवत रहा, यही लिए आप सबके पास आएं रहा के कुछ बुद्धि हमार भी खुले। ई तो अच्छा हुआ कि चाचा आप मिल गए, वरना सब गुड़ गोबर हुई गवा होत आज तो। खैर अब हमार समझ म आई गवा है, दुनियादारी एक कइती और गांव की बात एक कइती। अब गांव के बारे मे जउन सोची परधानी वही का मिली। जउन आपन जेब भरी ओका न देबे भूंजी भांग। चला सब जने आज कसम खाई के, जे गांव के आगे लै जाई वही के सब जन माला पहनाई। बहरहाल ये चर्चा का विषय था आज शहजादपुर गांव का, जहां लगभग 6000 से भी ज्यादा मतदाता हैं और युवाओं की भूमिका अग्रणी है। चर्चा के गलियारों से इस बार विकास की खुशबू आ रही है। सभी का रुझान एक कुशल एवं योग्य उम्मीदवार को चुनने की है। अब देखने वाली बात ये है कि चुनावी महाकुंभ में ऊंट किस करवट बैठता है। इस बार पंचायत चुनाव पांच साल बाद भले हो रहा हो, लेकिन इन पांच सालों में जनता के अंदर विकास रूपी जागरूकता की जो बयार जगी है, वो निश्चित रूप से अपने साथ जातिपात, ऊंच नीच, भेदभाव रूपी गंदगी को अपने साथ उड़ा ले जाने को बेताब है। इस बार का चुनाव बदलाव की खुशबू लेकर आने वाला है या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन कहते हैं न पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं तो इस बार पूत अपने सपूत होने सबूत अभी से दे रहा है। बस देखना है कि चुनावी सियासत के मैदान में जनता रूपी बल्लेबाज छक्का मारता है या नहीं।

 

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