यूजीसी ने Allahabad University से किया जवाब तलब, संविदा भर्ती टेंडर देने में पैसे लेने का मामला

विश्वविद्यालय प्रशासन ने संविदा पर कर्मचारियों की भर्ती के लिए फर्म चयन का टेंडर जारी किया था। यह टेंडर लखनऊ की एक फर्म को मिला। फर्म ने कुल 219 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया और बैंक रोड स्थित अतिथि गृह में 25 मार्च से इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू की।

Ankur TripathiSat, 24 Jul 2021 07:00 AM (IST)
इविवि प्रशासन ने आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए यूजीसी को जल्द जवाब भेजने की दी जानकारी

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। यूजीसी ने इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (इविवि) में संविदा पर कर्मचारी भर्ती के लिए टेंडर देने के लिए वायरल वीडियो और आडियो के मामले में जवाब तलब कर लिया है। मार्च में वायरल इस वीडियो में प्रयागराज की कंसल्टेंट कंपनी ने इविवि के दो शीर्ष अफसरों को दो करोड़ रिश्वत लेने के बाद टेंडर जारी करने के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके एवज में वह नियुक्ति के नाम पर अभ्यर्थियों से रिश्वत मांग रहे थे। हालांकि, इविवि प्रशासन ने इन आरोपों को मनगढ़ंत करार दिया है।

एक छात्र ने की थी यूजीसी से शिकायत

विश्वविद्यालय प्रशासन ने संविदा पर कर्मचारियों की भर्ती के लिए फर्म चयन का टेंडर जारी किया था। यह टेंडर लखनऊ की एक फर्म को मिला। फर्म ने कुल 219 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया और बैंक रोड स्थित इविवि के अतिथि गृह में 25 मार्च से इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू की। इसी बीच इंटरनेट मीडिया पर एक आडियो और वीडियो वायरल कर दिया गया। इसमें पत्रिका चौराहा स्थित एक कंपनी के कुलदीप शर्मा और एके मिश्रा खुद को कंपनी का नुमाइंदा बताते हुए अभ्यर्थियों से 25 हजार रुपये मांग रहे थे। वह यह भी दावा कर रहे थे कि इसके बाद नियुक्ति हो जाएगी। इसी बीच कंपनी ने कोरोना महामारी का हवाला देते हुए भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी और कर्नलगंज थाने में मुकदमा भी दर्ज करा दिया। बाद में इविवि में एलएलएम प्रथम वर्ष के छात्र अजय यादव सम्राट ने मामले की शिकायत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी कर दी। अब इस प्रकरण में यूजीसी ने इविवि के रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ल को पत्र भेजकर स्पष्टीकरण तलब कर लिया है। साथ ही यूजीसी ने निर्देश दिया है कि जवाब की प्रति सम्राट को भी भेजी जाए। 

इविवि की पीआरओ बोलीं- वायरल वीडियो है तथ्यहीन

इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय की पीआरओ डाक्‍टर जया कपूर ने कहा कि यूजीसी की तरफ से मिले पत्र का उत्तर भेज जा रहा है। इस संदर्भ में पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि वायरल वीडियो पूरी तरह से तथ्यहीन, मनगढ़ंत व झूठी है। यह विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अफसरों की छवि को धूमिल करने का प्रयास है। पिछले वर्षों की भांति मैनपावर सप्लाई के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन ई-टेंडर के द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ सारे सरकारी नियम व कानून का पालन करते हुए किया गया है।

 

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