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कौशांबी में सहेलियों में हुआ प्रेम, मंदिर में शादी के बाद पहुंची कोर्ट, आखिर क्‍या हुआ

कौशांबी में सहेलियों में हुआ प्रेम, मंदिर में शादी के बाद पहुंची कोर्ट, आखिर क्‍या हुआ
Publish Date:Wed, 05 Aug 2020 09:05 PM (IST) Author: Brijesh Srivastava

प्रयागराज, जेएनएन।  प्रेमी युगलों के घर से भागकर शादी रचाने के तो किस्से आम हैैं लेकिन स्कूल में पढऩे वाली दो सहेलियों के प्रेम और शादी करने की जिद से लोग हैरत में पड़ गए। मंदिर में विवाह करने के बाद बुधवार को वे दोनों कोर्ट मैरिज के लिए भी पहुंची जहां किसी तरह समझा-बुझाकर उन्हें अपने-अपने घर भेज दिया गया।

भरवारी के एक स्कूल में पढऩे वाली चरवा और कोखराज क्षेत्र की दो लड़कियों के बीच साथ पढऩे के दौरान गहरा लगाव हो गया। हाई स्कूल से वे दोनों एक ही कक्षा में पढ़ रही थीं। इंटर की परीक्षा के बाद वे दोनों फोन पर बातचीत करने लगीं। उनमें इस कदर प्रेम गहराया कि उन्होंने एक-दूसरे से शादी का फैसला कर लिया ताकि जीवन भर साथ रह सकें।

 गांव के मंदिर में एक-दूसरे की मांग में सिंदूर भरकर शादी रचा ली

कोखराज इलाके की छात्रा तीन अगस्त को घर से भागकर चरवा इलाके में अपनी सहेली के घर पहुंच गई। वहां से दोनों गांव के बाहर बने एक मंदिर में पहंची और एक-दूसरे की मांग में सिंदूर भरकर शादी रचा ली। इधर दोनों के घर से गायब होने पर परिवार के लोगों ने खोजबीन शुरू की। तलाश करते हुए वे मंदिर पहुंचे तो दोनों सहेलियों को विवाह करते देखकर दंग रह गए।  उन्हें समझाकर घर ले जाने लगे मगर वे एक-दूसरे से अलग होने के लिए राजी नहीं हो रही थीं। ऐसे में उन दोनों को चरवा इलाके की छात्रा घर ले जाया गया। मंगलवार को दोनों थाने पहुंची। उन्होंने परिवार के लोगों पर उनके साथ जबरदस्ती करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी। पूरा मामला समझते ही पुलिस वाले भी उनको समझाने लगे। थोड़ी देर बाद स्वजन भी आ गए। थाने में पंचायत के बाद शाम को दोनों वहां से चली गई। बुधवार सुबह दोनों सहेलियां मंझनपुर स्थित जिला न्यायालय आ गई। उन्होंने अधिवक्ता से मिलकर उनकी शादी को वैध कराने का प्रयास किया। माजरा जानकर अधिवक्ता भी हैरान हो गए।

नाबालिग होने के चलते समझा बुझाकर ले गए घर

उन्होंने दोनों को कानूनी पहलू बताया कि दोनों नाबालिग हैं। ऐसे में वे दोनों अभी अपनी मर्जी से ऐसा कोई फैसला नहीं कर सकती हैैं। साथ ही सामाजिक कारण बताकर समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह जिद पर अड़ी रही। इसी दौरान उनके स्वजन भी न्यायालय आ गए। सुबह से शाम करीब पांच बजे तक वह दोनों किशोरियों को अलग-अलग स्थान पर लेकर समझाते रहे। आखिरकार दोनों ने जिद छोड़ी तो उन्हें घर ले जाया गया। इस मसले के कारण दिन भर न्यायालय में भीड़ लगी रही। इस मामले पर परिवार के लोगों ने बात करने से इंकार कर दिया।

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