साधना में बीता समय, बीमारी का नहीं था भय, प्रयागराज में ज्योतिषाचार्य विद्याकांत पांडेय ने दी कोरोना को मात

ज्यादा संख्या ऐसे लोगों की हैं जिन्होंने महामारी को मात देकर नया जीवन हासिल किया।

कोरोेना काल में बहुत से लोग वायरस की चपेट में आकर काल कवलित हो गए ज्यादा संख्या ऐसे लोगों की हैं जिन्होंने महामारी को मात देकर नया जीवन हासिल किया। तमाम संयम बरतने के बावजूद मैं और मेरी पत्नी सरोज पांडेय कोरोना से संक्रमित हो गए।

Ankur TripathiMon, 17 May 2021 07:30 AM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। कोरोेना काल में बहुत से लोग वायरस की चपेट में आकर काल कवलित हो गए ज्यादा संख्या ऐसे लोगों की हैं जिन्होंने महामारी को मात देकर नया जीवन हासिल किया। तमाम संयम बरतने के बावजूद मैं और मेरी पत्नी सरोज पांडेय कोरोना से संक्रमित हो गए। हमारे संक्रमित होने पर घर में भय का माहौल व्याप्त हो गया। बच्चे व रिश्तेदार चिंतित थे। लेकिन, मुझे कोई भय नहीं था। बीमारी के उस कालखंड को मैंने साधना में व्यतीत किया। घर में रहकर मैं और मेरी पत्नी पूजा करने, धार्मिक पुस्तकें पढऩे व उस पर चर्चा में व्यतीत करते थे। इससे तन व मन को आंतरिक ऊर्जा मिली और हम ठीक हो गए। यह कहना है बलुआघाट निवासी पराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय का। संयमित दिनचर्या के जरिए पति-पत्नी ने कोरोना को मात दे दिया। आचार्य विद्याकांत बताते हैं कि बीमारी के दौरान समय पर दवा, काढ़ा व सात्विक भोजन तय समय पर लेते रहे।  दिल व दिमाग में कोरोना का भय न होने पाए उसके लिए धर्म का सहारा लिया। मन में 'शूलेन पाहि नो देवि पाहि खडग़ेन चाम्बिका-घंटा स्वनेन न पाहि चा पज्यानि स्वनेन चÓ, 'ऊं हौं जूं स:, 'ओम नम: शिवाय व महामृत्युंजय मंत्र का जप मन ही मन करते रहे। पत्नी के साथ धार्मिक चर्चा करने से मन से बीमारी का भय खत्म हो गया।

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