इनको किसी की जान की परवाह नहीं, दौड़ा रहे अनफिट वाहन

इनको किसी की जान की परवाह नहीं, दौड़ा रहे अनफिट वाहन

अतुल यादव प्रयागराज सड़क हादसे में आए दिन किसी न किसी की जान चली जाती है। इन हादसों के अलावा तमाम सड़क दुर्घटनाएं अनफिट वाहनों के चलते होती हैं। प्रयागराज में कुल पंजीकृत के सापेक्ष 35 प्रतिशत वाहन अनफिट हैं जो बेधड़क सड़कों पर फर्राटा लगा रहे हैं।

Publish Date:Thu, 26 Nov 2020 03:59 AM (IST) Author: Jagran

अतुल यादव, प्रयागराज : सड़क हादसे में आए दिन किसी न किसी की जान चली जाती है। इन हादसों के अलग-अलग कारण है लेकिन इनमें एक सबसे अहम कारण अनफिट वाहन भी हैं। परिवहन कार्यालय में लाखों वाहन पंजीकृत हैं और इसमें से 35 फीसद वाहन अनफिट है। जो बिना फिटनेस के सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। कई बार इन वाहन संचालकों पर कार्रवाई होती है लेकिन, अधिकतर वाहन अफसरों की निगाह से बच बचाकर सड़क पर चल रहे हैं। ऐसे वाहन चालकों को अपनी चिंता नहीं और दूसरों के लिए भी जान का खतरा बने रहते हैं।

यदि प्रयागराज जनपद की बात करें तो यहां 13 लाख 51 हजार 118 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 35 फीसद वाहन अनफिट हैं। 65 फीसद वाहनों में भी ज्यादातर बगैर किट तो किसी के पास टूल में कमी है। आकड़ों की बात करें तो कुल सड़क दुर्घटनाओं में 2.4 फीसद, वाहनों की जर्जर हालत के चलते होती हैं। वाहनों के लिए अनिवार्य सुरक्षा मानक जैसा कोई प्रावधान अभी देश में नहीं है। एनसीएपी क्रैश टेस्ट में सभी भारतीय कारें फेल हो जाती हैं। इनको जीरो स्टार रेटिंग मिलती है। अलग-अलग श्रेणी में इतने हैं वाहन

- 42490 माल वाहक

- 47242 मोपेड

- 2939 बसें

- 1368 स्कूल बस

- 8174 ई-रिक्शा

- 560 मैक्सी कैब

- 3509 मोटर कैब

- 155041 मोटर कार

- 7066 तिपहिया (माल वाहक)

- 18093 तिपहिया (सवारी वाहन)

- 1066031 बाइक व स्कूटर इनसेट:::

वाहनों के फिटनेस की पड़ताल

मिरर, हेड लाइन, साइड, रिफ्लेक्टर, बैक गियर में लाइट, फॉग लाइट, बैक लाइट, पाìकग लाइट, कलर रिफ्लेक्टर पीयूसीसी की ओर से जारी प्रदूषण प्रमाण पत्र होना चाहिए। गाड़ी की बॉडी ओवर हाइट नहीं होनी चाहिए। किसी वाहन की फिटनेस जाच कराने के लिए वाहन आरटीओ कार्यालय लाना अनिवार्य है। एआरटीओ प्रशासन सियाराम वर्मा के मुताबिक, प्रतिदिन करीब 70 से 80 गाड़िया फिटनेस कराने के लिए लाई जाती है। जुगाड़ गाड़ी से भी होते हैं हादसे

आंचलिक क्षेत्रों में राजमार्गो पर ज्यादातर हादसे जुगाड़ वाहनों की वजह से होते हैं। पंजीकरण न होने के कारण इन वाहनों की गिनती भी नहीं होती है। हालांकि विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। लेकिन, यह महज खानापूर्ति तक ही सीमित होकर रह जाते हैं। ट्रैक्टर या जुगाड़ चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की जाच नहीं की जाती है। इसलिए अप्रशिक्षित चालक वाहनों से फर्राटा भरते हैं।

अनफिट गाड़ियां चलाने में दिक्कत होती है। कई बार माल फंस जाता है। इससे व्यापारियों को दिक्कत होती है। यदि सवारी वाहन है तो यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे वाहनों को चिह्नित कर रोक लगानी चाहिए।

- अनिल कुशवाहा, अध्यक्ष, इलाहाबाद गुड्स एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन

--------- जानमाल का नुकसान होता है। बगैर फिटनेस वाहनों पर सख्ती से प्रतिबंध लगाना चाहिए। क्योंकि दुर्घटना होने पर गाड़ी मालिक और पीड़ित किसी को भी बीमा योजना का क्लेम नहीं मिलता है। जनहानि होने से आश्रितों को भी जीवन पर पछतावा करना पड़ता है।

- अमर वैश्य, अध्यक्ष, प्रयागराज ट्रांसपोर्ट यूनियन

---------- अनफिट वाहनों के साथ ओवरलोडिंग पर भी रोक लगानी चाहिए। 10 चक्के वाले ट्रकों पर मानक से अधिक माल लोड किया जा रहा है। इससे सड़कें खराब हो रही है। साथ ही छोटे वाहनों को माल भाड़ा नहीं मिलता।

- परमानंद त्रिपाठी, अध्यक्ष, मिनी ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन

------------------------ पुराने वाहन धड़ल्ले से शहर में दौड़ रहे हैं। जबकि, प्रदूषण नियंत्रण के लिए इन्हें शहर के बाहर करने का आदेश है। प्रयागराज जंक्शन से राजरूपपुर और करेली के लिए बगैर फिटनेस वाले ऑटो चल रहे हैं। इनकी चेकिंग भी नहीं होती।

- संजीत कुमार जायसवाल, अध्यक्ष, बस प्रयागराज टूर एंड ट्रैवेल वेल्फेयर एसोसिएशन

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व्यवसायिक वाहन स्वामी समय पर फिटनेस करा लें ताकि सुरक्षित वाहन चला सकें। बगैर फिटनेस पाए गए तो विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी।

- राजेश कुमार मौर्य, संभागीय परिवहन अधिकारी, प्रयागराज

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