मेडिकल कालेज प्रतापगढ़ के अस्पताल परिसर से सीएमओ दफ्तर हटाने के मसले पर मचा है घमासान

मेडिकल कालेज के प्राचार्य़ डा. आर्यदेश दीपक ने स्वास्थ्य विभाग को महीनों पहले पत्र लिखा था। कहा था कि सीएमओ कार्यालय चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत हो गया है। यह अस्पताल के परिसर में भी है। ऐसा नहीं होना चाहिए। प्रशासन द्वारा पूरा परिसर कालेज के लिए दिया गया है।

Ankur TripathiTue, 03 Aug 2021 03:17 PM (IST)
राजकीय मेडिकल कालेज परिसर से सीएमओ दफ्तर हटाने की रार कम नहीं हो रही।

प्रतापगढ़, जागरण संवाददाता। राजकीय मेडिकल कालेज परिसर से सीएमओ दफ्तर हटाने की रार कम नहीं हो रही। यह बढ़ती जा रही है। इसको लेकर सीएमओ व प्रिंसिपल के बीच लेटर वार तेज हो गया है। दोनों शासन को पत्र लिख रहे हैं।

प्राचार्य कहते हैं कि परिसर में और सीएमओ बोले बाहर

मेडिकल कालेज परिसर में इन दिनों अस्पताल का निर्माण चल रहा है। यहां पर 200 नए वार्ड समेत दर्जनों विभागों के कक्ष व ओपीडी का निर्माण होना है। इसी में मरीजों की आमद भी जोरों पर है। भीड़ से कार्य करने में दिक्कत हो रही है। ओपीडी में मेडिकल कालेज के डाक्टरों के बैठने की समुचित जगह नहीं है। एक कक्ष में दो-दो चिकित्सक बैठ रहे हैं। इस समस्या को लेकर मेडिकल कालेज के प्राचार्य़ डा. आर्यदेश दीपक ने स्वास्थ्य विभाग को महीनों पहले पत्र लिखा था। कहा था कि सीएमओ कार्यालय चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत हो गया है। यह अस्पताल के परिसर में भी है। ऐसा नहीं होना चाहिए। प्रशासन द्वारा पूरा परिसर कालेज के लिए दिया गया है। ऐसे में सीएमओ कार्यालय, आयुष विंग, कोविड कमांड सेंटर समेत भवन खाली किए जाएं। अब तक केवल बर्न वार्ड ही खाली हो सका है। अब वह शासन को पत्र लिखेंगे, ताकि भवन खाली हो सके। इधर क्षयरोग अस्पताल व स्टोर को भी खाली कराया जाना है। इस मसले पर सीएमओ डा. एके श्रीवास्तव कहते हैं कि उनका दफ्तर अस्पताल कैंपस से बाहर है। इसे यहां से हटाकर कहीं अन्यत्र ले जाने का सवाल ही नहीं उठता। यह भवन सीएमओ कार्यालय के नाम से बना है। 

एनएमसी की टीम करेगी मेडिकल कालेज का निरीक्षण

राजकीय मेडिकल कालेज को शुरू करने से पहले एनएमसी की टीम आएगी। तैयारियों का जायजा लेने को यह टीम कभी भी आ सकती है। सोमवार को यूपी के कुछ नए मेडिकल कालेजों में टीम की दस्तक हुई भी। इससे उम्मीद है कि जल्दी ही प्रतापगढ़ का नंबर आ सकता है। सदर के पूरे केशव राय गांव के किनारे दो अरब 13 करोड़ की लागत से मेडिकल कालेज बना है। वास्तव में जब इसे मंजूरी मिली तो कालेज व अस्पताल एक ही जगह बनने थे, पर एकमुश्त जमीन ही नहीं मिली। इसके कारण कालेज को अस्पताल व नगर से चार किमी दूर बनाना पड़ा। कालेज वाला हिस्सा बन गया है। प्रशासनिक भवन, डिजिटल क्लास रूम, अंदर की सड़कें बन चुकी हैं। बिजली की लाइन खींची जा चुकी है। कालेज में 30 से अधिक सहायक आचार्यों ने ज्वाइन कर लिया। है। कई जूनियर डाक्टर भी आ गए हैं। यही नहीं हाल ही में विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा शुभ्रा सक्सेना निरीक्षण कर चुकी हैं। प्रोजेक्ट के दूसरे हिस्सा 500 बेड का अस्पताल पुराने पुरुष व महिला अस्पताल को जोड़कर बनाया जा रहा है। नए वार्ड, ओपीडी, ओटी, पार्क समेत कक्ष बनाए जा रहे हैं। मेडिकल कालेज में 100 सीटों पर एमबीबीएस की पढ़ाई होगी। अभी इसे केजीएमयू से संबद्ध किया गया है। बाद में अटल चिकित्सा विवि से संबद्ध होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि एक-दो दिन में नेशनल मेडिकल काउंसिल की टीम आएगी। उसके ओके करने के बाद पीएम द्वारा लोकार्पण का कार्यक्रम तय होगा। मेडिकल कालेज के सामने वाली मुख्य सड़क अब तक न बन सकी। राम वन गमन मार्ग में यह सड़क है, जिसे एनएच को बनाना है।

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