Dufferin Hospital: प्रयागराज के जिला महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों और कर्मचारियों की अखर रही कमी

अस्पताल की ओपीडी में एक डाक्टर पर करीब 150 महिला मरीजों को देखने का लोड रहता है। जबकि मानक एक डाक्टर पर 40 मरीजों का है। ओपीडी के हालात देखकर महिलाओं की तकलीफ बढ़ना लाजिमी है और तनावग्रस्त डाक्टरों की डांट फटकार मरीजों का मन अस्पताल से बिचका देती है।

Ankur TripathiWed, 28 Jul 2021 07:00 AM (IST)
खुद इलाज को तरस रहा महिला अस्पताल (डफरिन), स्त्री रोग विशेषज्ञ के छह पदों में दो पर है तैनाती

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। अस्पताल की सूरत अगर अच्छी हो तो यह जरूरी नहीं कि वहां व्यवस्थाएं चाक चौबंद हैं। तकलीफदेह यह है कि मरीजों का दर्द दूर करने वालों की पीड़ा सूबे की राजधानी को महसूस नहीं हो रही है क्योंकि सरकारी फाइलों में यहां का मौसम भी गुलाबी है। एकमात्र जिला महिला अस्पताल (डफरिन) भी इसी बीमार व्यवस्था का शिकार है। इस अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों के छह पदों के सापेक्ष केवल दो डाक्टरों से किसी तरह काम चलाया जा रहा है। यहां की व्यवस्थाओं से परेशान लोग प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर लेते हैं।

ऐसे कैसे चलेगा काम

कुल पद 20 चिकित्साधिकारी, चार खाली

एक प्रमुख चिकित्साधीक्षक तैनात

छह स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद, चार खाली

दो ईएमओ के पद, एक का स्थानांतरण

एक फिजीशियन पद पर तैनाती

तीन एनस्थीसिया के डाक्टर तैनात

एक अल्ट्रासोनोलाजिस्ट तैनात

दो बाल रोग विशेषज्ञ तैनात

एक पैथालाजिस्ट तैनात

268 बेड का अस्पताल, फिर भी यह हाल

डफरिन अस्पताल, बेड के मामले में मंडलीय और जिला अस्पताल से भी बड़ा है। इसमें कुल 268 बेड की व्यवस्था है। इन सभी पर मरीजों की भर्ती की जाती है लेकिन, स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी के चलते वार्ड में डाक्टरों के राउंड जरूरत के अनुसार नहीं हो पाते हैं। और इतने अधिक मरीजों की देखभाल वर्तमान में आठ या 10 डाक्टर ही अपने टर्न के अनुसार कर पाते हैं।

एक डाक्टर पर 150 मरीजों का लोड

अस्पताल की ओपीडी में एक डाक्टर पर करीब 150 महिला मरीजों को देखने का लोड रहता है। जबकि मानक एक डाक्टर पर 40 मरीजों का है। ओपीडी के हालात ही देखकर महिलाओं की तकलीफ बढऩा लाजिमी है और तनावग्रस्त डाक्टरों की डांट फटकार मरीजों का मन अस्पताल से बिचका देती है।

50 फीसद कर्मचारियों की कमी

डफरिन अस्पताल में आए दिन कर्मचारियों के बीच चिकचिक होती है क्योंकि यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की 50 फीसद कमी है। चतुर्थ श्रेणी में यहां कुल 71 पद हैं इनमें 39 ही कार्यरत हैं। कर्मचारियों की इस कमी के चलते अधिकांश शासकीय अक्सर प्रभावित रहते हैं। आउटसोर्स पर लगे कर्मचारी मनमर्जी से काम करते हैं। कर्मचारियों के समय पर मिलने या कुछ लोगों के अवकाश पर रहने से सीनियर डाक्टर भी परेशान हो जाते हैं।

पीपीसी भी समस्याग्रस्त

पीपीसी यानी पोस्ट पार्टम सेंटर (प्रसवोत्तर केंद्र) में भी चिकित्साधिकारी के दो में से एक पद खाली हैं। स्टाफ नर्स के दो पद खाली और एक ड्राइवर का पद भी काफी दिनों से रिक्त चल रहा है। इस केंद्र में इस केंद्र में सीमित समय में परिवार नियोजन की सुविधा, मिनीलैप एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, पोस्ट पार्टम नसबंदी, गर्भनिरोधक सुविधाएं जैसे महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। लेकिन स्टाफ की कमी से यह केंद्र भी जूझ रहा है।

अस्पताल में डाक्टरों की कमी है और कर्मचारियों का भी काफी अभाव है। स्वास्थ्य महानिदेशालय को पत्र भेजकर डाक्टरों की मांग की जाती है। यह मांग कब पूरी होगी पता नहीं, हमारे एक और डाक्टर स्थानांतरित हो रहे हैं। मांग पत्र की प्रतिलिपि एडी हेल्थ को भी भेजते हैं। अस्पताल को जैसे तैसे मैनेज कर पा रहे हैं।

डा. ज्योति, एसआइसी

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