अभिनेत्री स्वातिलेखा के निधन पर रंगकर्मी आहत, शोक सभा का आयोजन कर अर्पित की श्रद्धांजलि

स्वाति ने 1968 में कोलकाता जाकर रंगमंच के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। प्रसिद्ध रंग निर्देशक रुद्र प्रसाद सेन गुप्ता से विवाह करने के बाद नांदीकार संस्था बनाकर उसके जरिए रंगकर्म को देशभर में लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई।

Ankur TripathiThu, 17 Jun 2021 06:50 AM (IST)
बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री स्वातिलेखा सेन गुप्ता का बुधवार को निधन हो गया।

प्रयागराज, जेएनएन। रंगमंच व बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री स्वातिलेखा सेन गुप्ता का बुधवार को निधन हो गया। कोलकाता के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। स्वाति के निधन पर प्रयागराज का रंगमंच जगत स्तब्ध है। हर किसी ने उनके निधन पर शोक व्यक्ति करते हुए रंगमंच के लिए अपूरणीय क्षति बताया। स्वाति का जन्म 22 मई 1950 को प्रयागराज में नवाब युसूफ रोड स्थित घर में हुआ था। जगत तारन गल्र्स डिग्री कालेज में 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त किया। यहीं अनुकूल चंद्र बनर्जी के निर्देशन में रंगकर्म सफल की की शुरुआत किया था।

रंगमंच के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया

स्वाति ने 1968 में कोलकाता जाकर रंगमंच के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। प्रसिद्ध रंग निर्देशक रुद्र प्रसाद सेन गुप्ता से विवाह करने के बाद नांदीकार संस्था बनाकर उसके जरिए रंगकर्म को देशभर में लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। बैकस्टेज संस्था के निदेशक प्रवीण शेखर बताते हैं कि आंटीगोन, नाचनी, चोखगेलो, सानू रोयचोवधी, पांचजन्य जैसे उनके चर्चित नाटक थे। युवा रंगकर्मी अंजल सिंह बताते हैं कि 2009 में उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला। वो बड़ी अभिनेत्री के साथ मातृत्व की धनी थीं। छोटे कलाकारों के प्रति उनका आत्मीय जुड़ाव रहता था। समानांतर संस्था के सचिव अनिल रंजन भौमिक बताते हैं कि स्वाति ने बांग्ला फिल्मों में प्रसिद्ध फिल्मकार सत्यजीत रे के निर्देशन में फिल्म घरे बाइरे में काम किया था। बेला शेष, बेलाशुरू, धर्मजुद्धा जैसी फिल्में काफी चर्चित रहीं। उन्हेंं अभिनय के लिए संगीत नाटक अकादमी सम्मान के अतिरिक्त पश्चिम बंग नाट्य एकेडमी से भी सम्मानित किया गया था। अभिनय करने के लिए उनका अक्सर प्रयागराज आना होता था। यह शहर उनकी सांसों में बसता था। रूपकथा संस्था के सदस्य अरिंदम घोष कहते हैं स्वाति का प्रयागराज से आत्मीय जुड़ाव था। वो हर प्रमुख मौकों पर यहां आती थीं, उनका निधन रंगमंच के साथ प्रयागराज के लिए अपूरणीय क्षति है।

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