प्रधान डाकघर परिसर प्रयागराज में ​​​​अंग्रेजों के जमाने का है कुआं, सफाई होने पर बुझाएगा सैकड़ों की प्यास

प्रधान डाकघर कैंपस में आफिसर्स और स्टॉफ कालोनियां बनी हैं। रेलवे की भी कालोनी है। ऐसे में अगर इस कुएं की सफाई कराकर मोटर और पाइप लगवा दी जाए तो इन कालोनियों में रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा आने वाले सैकड़ों लोगों को भी शुद्ध पानी मिलने लगेगा।

Ankur TripathiTue, 22 Jun 2021 06:50 AM (IST)
अंग्रेजों ने डाकघर के निर्माण समय बनवाया था। कुएं का पानी आज भी बहुत मीठा और शीतल है।

प्रयागराज, जेएनएन। प्रधान डाकघर परिसर में अंग्रेजों के पुराना कुआं है। इसे अंग्रेजों ने डाकघर के निर्माण समय बनवाया था। कुएं का पानी आज भी बहुत मीठा और शीतल है। लेकिन, सफाई न होने से कुआं बेकार है। अगर इसकी सफाई कराकर उसमें मोटर और पाइप लगवा दी जाए तो सैकड़ों लोगों की प्यास इस कुएं के पानी से बुझ सकेगी।

प्रधान डाकघर का कुआं काफी बड़ा और पक्का है। पेड़ों की पत्तियां और गंदगी से बचाव के लिए ऊपर लोहे की छतरी लगी है। कुएं में कोई गिरने न पाए इसके लिए लोहे की मजबूत जालियां भी लगी हैं। पानी की शुद्धता बरकरार रखने के लिए कुएं के अंदर तांबे के बड़े प्लेट डाले गए हैं। कुएं के चबूतरे पर एक बाल्टी और रस्सी रखी रहती थी। इससे प्रधान डाकघर में आने वाले आम लोग कुएं से जल लेकर पीते थे। लेकिन, मौजूदा समय में कुएं की सफाई न होने से पानी की निकासी बहुत कम है। अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कुएं की सफाई के लिए नगर निगम से कई बार पत्राचार किया मगर, निगम ने हाथ खड़े कर दिए।

कैंपस में आफिसर्स और स्टॉफ कालोनियां

प्रधान डाकघर कैंपस में आफिसर्स और स्टॉफ कालोनियां बनी हैं। सड़क के उस पार रेलवे की भी कालोनी है। ऐसे में अगर इस कुएं की सफाई कराकर मोटर और पाइप लगवा दी जाए तो इन कालोनियों में रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा आने वाले सैकड़ों लोगों को भी शुद्ध पानी मिलने लगेगा। अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ के क्षेत्रीय सचिव प्रमोद कुमार राय बताते हैं कि कुएं की सफाई के लिए कौशांबी जिले से मजदूर बुलाने की बहुत कोशिश की गई मगर, सफलता नहीं मिली।

तांबे के बर्तन में पानी पीने से दूर होते सौ मर्ज

केंद्रीय कर्मचारी संघ समन्वय समिति के महासचिव बजरंग बली गिरि का कहना है कि कुएं में तांबे की प्लेटों का लगा होना अहम बात है। तांबे के महत्व का उल्लेख आयुर्वेद में भी मिलता है। तांबे के बर्तन में पानी पीने से 100 मर्जों के दूर होने का जिक्र भी है।

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