त्रिजटा स्नान पर आज संगम में डुबकी लगा रहे श्रद्धालु, माघ मेला क्षेत्र में रुके संत व कल्पवासी कर रहे हैं सन्नान

धार्मिक मान्यता है कि त्रिजटा स्नान करने पर ही कल्पवास का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं कि माघ मास में संगम की रेती पर कल्पवास करने वालों को त्रिजटा स्नान करना चाहिए। त्रिजटा स्नान कर दान व पूजन करने वालों का कल्पवास पूर्ण माना जाता है। माघी पूर्णिमा फाल्गुन कृष्णपक्ष की प्रतिप्रदा व द्वितीया का स्नान लगातार पड़ता है।

Ankur TripathiMon, 01 Mar 2021 06:00 AM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन।  फाल्गुन कृष्णपक्ष की द्वितीया तिथि पर आज सोमवार को माघ मेला का अहम स्नान पर्व त्रिजटा है।  धार्मिक मान्यता है कि त्रिजटा स्नान करने पर ही कल्पवास का पूर्ण फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि संगम में डुबकी लगाने के लिए माघी पूर्णिमा के बाद भी मेला क्षेत्र में काफी संत व कल्पवासी रुक गए थे।


त्रिजटा स्नान से पूरा होता है कल्पवास

ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं कि माघ मास में संगम की रेती पर कल्पवास करने वालों को त्रिजटा स्नान करना चाहिए। संगम में त्रिजटा स्नान करके दान व पूजन करने वालों का ही कल्पवास पूर्ण माना जाता है।  माघी पूर्णिमा, फाल्गुन कृष्णपक्ष की प्रतिप्रदा व द्वितीया का स्नान लगातार पड़ता है। लगातार तीन दिन स्नान होने के कारण उसे त्रिजटा नाम से जाना जाता है। बताते हैं कि सोमवार की सुबह 10.39 बजे तक तृतीया तिथि है। लेकिन, उदया तिथि होने के कारण उसका प्रभाव दिनभर माना जाएगा।

वीरान होने लगा तंबुओं का शहर

माघी पूर्णिमा स्नान पर्व बीतने के बाद माघ मेला क्षेत्र वीरान होने लगा है। संतों व कल्पवासियों के टेंट लगातार उखड़ रहे हैं। रविवार को दंडी स्वामीनगर, आचार्यनगर व खाकचौक के अधिकतर महात्मा सामान समेटने में जुटे रहे। इससे अलग-अलग शिविरों में चलने वाला भंडारा भी रुक गया। मेला क्षेत्र से 90 प्रतिशत कल्पवासी अपने घर रवाना हो गए हैं। इससे माघ मेला क्षेत्र वीरान होने लगा है। जो रुके हैं वो भी आज त्रिजटा का स्नान करने के बाद रवाना हो जाएंगे। इसके बाद मेले में बहुत कम संख्या में ही  लोग रह जाएंगे।

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