हाल सही नहीं प्रतापगढ़ के अस्पतालों का, आखिर कैसे मिलेगी प्राण वायु जब अधूरे हैं आक्सीजन प्लांट

कोरोना की पहली और दूसरी लहर में आक्सीजन की भारी कमी पड़ गई थी। बहुत से मरीजों की जिंदगी पर संकट आ गया था। सिलिंडर खोजे नहीं मिल रहे थे। एक मात्र लाइसेंसी वेंडर होने से होम आइसोलेट मरीजों को प्राण वायु मुश्किल से मिल रही थी।

Ankur TripathiThu, 05 Aug 2021 05:33 PM (IST)
अस्पतालों में आपूर्ति अभी मुमकिन नहीं, तीसरी लहर की तैयारी की गति धीमी

प्रतापगढ़, जागरण संवाददाता। कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए जिले में हो रहे इंतजाम की रफ्तार चिंताजनक है। आक्सीजन प्लांट लगाने का कार्य अभी पूरा नहीं हो पाया है। जागरण टीम ने अपने अभियान की पड़ताल में सब अधूरा पाया। सीएचसी की बात दूर, मेडिकल कालेज के अस्पतालों में भी कार्य अधूरा है।

दूसरी लहर में मची थी आक्सीजन के लिए हायतौबा

कोरोना की पहली और दूसरी लहर में आक्सीजन की भारी कमी पड़ गई थी। बहुत से मरीजों की जिंदगी पर संकट आ गया था। सिलिंडर खोजे नहीं मिल रहे थे। एक मात्र लाइसेंसी वेंडर होने से होम आइसोलेट मरीजों को प्राण वायु मुश्किल से मिल रही थी। उसको देखते हुए शासन ने मेडिकल कालेज और प्रमुख सीएचसी पर आक्सीजन प्लांट लगाने को मंजूरी दी। मेडिकल कालेज के पुरुष अस्पताल में तीन महीने से कार्य चल रहा है और अभी केवल शेड व प्लेटफार्म ही बन पाया है। मशीनें नहीं लग पाई हैं। अभी यहां का काम पुराने आक्सीजन प्लांट से किसी तरह चल रहा है। तीसरी लहर इसी महीने आने की आशंका है। उसको देखते हुए अब तक कार्य पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन नहीं हुआ। महिला विंग में महिंद्रा कंपनी को प्लांट लगाना है। वहां भी कुछ खास कवायद नहीं दिख रही।

लालगंज में लगेंगे महीनों

ट्रामा सेंटर लालगंज में आक्सीजन प्लांट का कार्य हो रहा है। इसे पूरा होने में अभी महीनों लगेंगे। अभी तक यहां केवल प्लेटफार्म की ढलाई हो सकी है। पाइप लाइन नहीं बिछ सकी है। मशीनों का पता ही नहीं है।

रानीगंज भी तैयार नहीं

रानीगंज सीएचसी भी आक्सीजन उपलब्ध कराने की स्थिति में अब तक नहीं दिख रही है। यहां पर अभी प्लांट की शुरुआत हुई है। अभी सिलिंडर से काम चलाया जा रहा है। शेड बन रहा है, मशीनें नहीं आई हैं।

कुंडा में शुरुआत ही नहीं

सीएचसी कुंडा में आक्सीजन प्लांट का भविष्य तय नहीं है। विभाग ने जमीन तलाशी, जनप्रतिनिधि से उनकी निधि से सहायता मांगी है। कब मिलेगी तय नहीं। मरीज सिलिंडर के भरोसे हैं, लगता है आगे भी रहेंगे।

पट्टी में इंजीनियर का इंतजार

आक्सीजन प्लांट की व्यवस्था में पट्टी सीएचसी कुछ मजबूत है। यहां पर प्लांट लग गया है। पाइप लाइन बिछ गई है। अब चलाने के लिए कंप्रेशर इंजीनियर लेबल से इसकी एनओसी मिलने का इंतजार है।

नहीं है रेमडेसिविर, फेरापिराविर

कोरोना संक्रमण में जीवन रक्षक के तौर पर मानी गई रेमडेसिविर, फेरापिराविर की उपलब्धता नहीं है। तीसरी लहर के लिए डिमांड भी नहीं की गई है। मेडिकल स्टोर को बेचने की अनुमति भी औषधि और स्वास्थ्य विभाग से नहीं मिली।

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