उल्टा किला पर है प्राचीन हनुमान गुफा, प्रयागराज में यहां होता है भक्ति भाव के साथ रोमांच का अहसास

श्री प्राचीन हनुमान गुफा शहर से शास्त्री पुल पार करते ही गंगा किनारे झूंसी में ऊंचे टीले पर है।

गंगा किनारे बनी सड़क किनारे सीधी खड़ी सीढ़ियां चढ़कर उल्टे किले के ऊपर पहुंचने पर आप मंदिर के मुहाने पर आते हैं। एक दरवाजा पारकर मंदिर परिसर में पहुंचते हैं। मंदिर परिसर से ही एक दरवाजे के पार जाने पर नीचे हनुमान गुफा की तरफ सीढ़ियां जाती दिखती हैं।

Ankur TripathiSat, 15 May 2021 02:32 PM (IST)

​​​​​प्रयागराज, जेएनएन। प्रयागराज शहर से पूरब दिशा में गंगा पारकर झूंसी पहुंचने पर दाहिनी ओर टीलों की श्रृंखला दिखाई देती है। इसके नीचे तमाम निर्माण दबे हुए हैं। इसे उल्टा किला के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि यहीं प्राचीनकाल में प्रतिष्ठानपुर नगर था।  चंद्रवंशीय राजाओं की राजधानी भी थी। झूंसी के नामकरण व उल्टे किले को लेकर कई जनश्रुतियां व किवदंतियां हैं। इस उल्टे किले में है प्राचीन गुफा वाला हनुमान मंदिर और अन्य दर्शनीय स्थल जहां जाकर रोमांच का भी अनुभव होता है।

गंगा किनारे ऊंचे टीले पर श्री प्राचीन हनुमान गुफा मंदिर

श्री प्राचीन हनुमान गुफा शहर से शास्त्री पुल पार करते ही गंगा किनारे झूंसी में ऊंचे टीले पर है। जानकार बताते हैं कि उल्टा किला और हनुमान गुफा लगभग नौ साल पुराना है। गंगा किनारे बनी सड़क किनारे सीधी खड़ी सीढ़ियां चढ़कर उल्टे किले के ऊपर पहुंचने पर आप मंदिर के मुहाने पर आते हैं। एक दरवाजा पारकर मंदिर परिसर में पहुंचते हैं। मंदिर परिसर से ही एक दरवाजे के पार जाने पर नीचे हनुमान गुफा की तरफ सीढ़ियां जाती दिखती हैं। टीले से तकरीबन सौ फुट नीचे है हनुमान गुफा। सीढ़ियां उतरने पर एक गलियारे में पहुंचते हैं जिसके एक छोर पर है हनुमान जी की प्रतिमा। इस गलियारे के ही दोनों तरफ मिट्टी की कई गुफाएं हैं। गलियारा भी पहले मिट्टी का था जिसे कुछ साल पहले पक्का कराया गया है। मंदिर के महंत बिपिन बिहारी और उनके शिष्य देखरेख करते हैं। हर साल माघ मेला के अलावा कुंभ लगने पर ही यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ती है वैसे बहुत कम लोग जानकारी के अभाव में वहां जाते हैं। यह प्राचीन और धार्मिक स्थल होने के साथ ही रोमांचक भी है। यहां पहुंचने वाले लोगों को अलग ही अहसास होता है।


ऐसे स्थलों को सहेजने और विकास की है जरूरत

साहित्य और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय व्रतशील शर्मा का कहना है कि शासन-प्रशासन को ऐसे प्राचीन स्थलों को सहेजना और उनका विकास करना चाहिए। वैसे यह पुरातत्व विभाग से संरक्षित है लेकिन इसका प्रचार-प्रसार और विकास सही ढंग से नहीं हो सका है। व्रतशील बताते हैं कि उन्होंने अपने नगर को जानिए और अपनी विभूतियों को पहचानिए स्लोगन के साथ इस विषय पर अभियान शुरू करने की सोची थी जिसे कोरोना महामारी की वजह से अभी रोकना पड़ा है।

उल्टा किला के समीप खनन में मिले प्राचीन सभ्यता के अवशेष

उल्टा किले में बने मंदिर और अन्य निर्माण की देखरेख महंत बिपिन बिहारी करते हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के शोधकर्ता व पुरातत्वविदों की टीम ने यहां कई बार खुदाई की है जिसमें प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं, मिट्टी के बर्तन और मूर्तियां आदि भी पाई गई हैं। प्राचीन काल से इस स्थान का जुड़ाव पाया गया लेकिन इसके रखरखाव व विकास के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। अगर इसका उचित विकास हो तो बड़ी संख्या में पर्यटकों की यहां आवाजाही हो सकती है। 

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