अब कौशांबी की फिजाओं में महकेगी स्ट्राबेरी, लीची और केले की भी हो रही है बढ़िया पैदावार

जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भाष्कर ने बताया कि नई फसलों के उत्पादन की योजना बनाई जा रही है। पहले केला और उसके बाद औषधीय पौधे की खेती को लेकर किसानों के बीच अच्छा रुझान मिला है। फूलों की खेती के बाद लीची के उत्पादन का लक्ष्य मिला था।

Ankur TripathiWed, 04 Aug 2021 10:30 AM (IST)
जिला उद्यान विभाग को छह हेक्टेयर में पैदावार करने का मिला है लक्ष्य

कौशांबी, नीरज सिंह। पिछले कुछ समय से खेती के परंपरागत तौर तरीके से हटकर किसान नए प्रयोग कर रहे हैं। उद्यान विभाग विभिन्न फलों के उत्पाद की जिले में पैदावार बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इरादा किसानों की आय में हर हाल में वृद्धि करना है। लीची के बाद अब स्ट्राबेरी की फसल तैयार करने की योजना है। इसके लिए उद्यान विभाग को छह हेक्टेयर पैदावार का लक्ष्य दिया गया है।

औषधीय पौधे की खेती का किसानों के बीच अच्छा रुझान

जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भाष्कर ने बताया कि जिले में नई नई फसलों के उत्पादन की योजना बनाई जा रही है। पहले केला और उसके बाद औषधीय पौधे की खेती को लेकर किसानों के बीच अच्छा रुझान मिला है। फूलों की खेती के बाद लीची के उत्पादन का लक्ष्य मिला था। जिस पर काम किया जा रहा है। करीब एक सप्ताह पहले स्ट्राबेरी के लिए जिले में लक्ष्य दिया गया है। डीएम के अनुमोदन के बाद अब छह हेक्टेयर भूमि पर स्ट्राबेरी की खोती की तैयार की जा रहा है। इसके लिए पहले आवक पहले पावक योजना के आधार पर किसानों का चयन किया जाना है। किसान जल्द से जल्द विभागीय कार्यालय व पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।

लाभकारी है स्ट्राबेरी

स्ट्राबेरी एक बहुत ही नाजुक फल होता है। यह स्वाद में हल्का खट्टा और हल्का मीठा होता है। दिखने में दिल के आकार का होता है। इसका रंग चटक लाल होता है। जिसका फ्लेवर कई सारी आइसक्रीम आदि में किया जाता है। स्ट्राबेरी में कई सारे विटामिन और लवण होते है जो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होते है। इसमें काफी मात्रा में विटामिन सी, विटामिन ए और के पाया जाता है। इसके सेवन से रूप में निखार और चेहरे के कील मुंहासे, आंखों की रौशनी, दांतों की चमक बढ़ती है। इसमें कैल्सियम, मैग्नीशियम, फोलिक एसिड, फास्फोरस पोटेशियम आदि प्रचुर मात्रा में होता है।

सितंबर में होती है खेती

सितंबर के प्रथम सप्ताह में खेत की तीन बार अच्छी जोताई कर लें। फिर एक हेक्टेयर जमीन में 75 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद को बिखेर कर मिटटी में मिला दे। इसके साथ पोटाश और फास्फोरस भी मिट्टी में परीक्षण के आधार पर देकर खेत तैयार करें। इसके बाद पूरे खेत को बेड का आकार दें। एक बेड से दूसरे बेड के बीच करीब डेढ़ फीट कर अंतर रखें। बेड तैयार होते ही यह रोपाई के लिए तैयार है। पौधे के बीच की दूरी कम से कम दो फीट होगी। 10 सितंबर से 15 सितंबर के मध्य पौधे का रोपण जरूरी है।

किसानों को मिलेगा अनुदान

स्ट्राबेरी के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार का अनुदान मिलेगा। साथ ही विभाग की ओर से पौधे दिए जाएंगे। यह पौधे बिहार से यहां आएंगे। आठ माह की इस फसल में किसानों की अन्य मदद उद्यान विभाग से की जाएगी। जिन किसानों ने पहले आवेदन किया है। उनको उसी क्रम में अनुदान भी दिया जाएगा।

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