COVID काल में जान गंवाने वालों के निराश्रित 7 बच्चों की दास्‍तां, नजदीकी रिश्‍तेदारों ने दिया सहारा

प्रयागराज जनपद में सात बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने कोरेाना काल में अपने माता और पिता दोनों को खो दिया है। 195 आवेदन में 135 बच्चों का सत्यापन भी हो चुका है। सभी को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सरकारी अमला प्रयासरत है।

Brijesh SrivastavaSat, 24 Jul 2021 10:03 AM (IST)
कोरोना वायरस संक्रमण के कारण जिन अभिभावकों की मौत हुई है, उनके बच्‍चों का सहारा रिश्‍तेदार बने हैं।

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। कोरोना काल में जान गंवाने वालों के निराश्रित बच्चों की दास्‍तां मार्मिक है। माता-‍पिता का स्‍थान तो दूसरा कोई नहीं ले सकता लेकिन ऐसे बच्‍चों के जीने का सहारा कहीं मौसी तो कहीं नानी बनी हैं। संक्रमण की चपेट में आने से माता-पिता के निधन के बाद बच्चों के सामने संकट पैदा हो गया। ऐसे में नजदीकी रिश्तेदाराें ने उनके सिर पर ममता का हाथ रखा। 18 वर्ष से कम आयु वर्ग के जिन बच्चों के माता या पिता या दोनों का निधन संक्रमण से हुआ, उनकी पढ़ाई और खर्च सरकार उठाएगी। इसके लिए सरकारी सहायता के रूप में 4000 रुपये प्रतिमाह दिए जा जाने की शुरुआत भी कर दी गई है। 

कोरोना काल में प्रयागराज के सात बच्‍चे हुए अनाथ

जनपद में सात बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने कोरेाना काल में अपने माता और पिता दोनों को खो दिया है। 195 आवेदन में 135 बच्चों का सत्यापन भी हो चुका है। सभी को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सरकारी अमला प्रयासरत है। शांतिपुरम में एक, दारागंज में एक, मीरापुर में भाई-बहन व रसूलाबाद में तीन बालिकाएं अपने रिश्तेदारों के साथ रह रही हैं। कोरोना ने तमाम परिवारों के सिर से माता पिता अथवा किसी एक का साया छीन लिया है। शांतिपुरम में माता-पिता को खो देने वाली बच्ची अपनी मौसी के साथ रह रही है।

परिवार के लोगों ने बनाई दूरी

रसूलाबाद के दंपती का निधन संक्रमण की चपेट में आने से हुआ। परिवार में 16 वर्षीय, 13 वर्षीय व 11 वर्षीय तीन बेटियां हैं। परिवार के लोग इन्हें अपनाने के बजाए छोड़कर चले गए। इसकी जानकारी पर अफसरों ने राशन उपलब्‍ध कराया। अब उनके नानी और मामा आकर बच्चों के साथ रह रहे हैं। दारागंज में एक बच्चे के मामा उसकी देखभाल कर रहे हैं। मीरापुर में माता-पिता की मौत के बाद भाई-बहन अपने बुजुर्ग दादा के साथ रह रहे हैं।

ननिहाल में बच्चे को मिला सहारा

दारागंज में एक बच्चा अपने मामा के घर पर रह रहा है। पिता प्रतापगढ़ में लेक्चर थे। संक्रमण से मौत होने के बाद मां भी सदमा नहीं झेल पाई और गोलोकवासी हो गई। 84 वर्षीय दादा को अब भी बेटे और बहू के निधन की जानकारी नहीं दी गई है। बड़ा भाई बीए तृतीय वर्ष का छात्र है। संकट की घड़ी में दुखों का पहाड़ टूटा तो ननिहाल में सहारा मिला। सरकारी मदद के रूप में 12 हजार रुपये खाते में भेजे गए हैं। लेकिन, बेटा माता-पिता के जाने का गम नहीं भूल पा रहा है।

भाई के जाने पर संभाली परिवार की जिम्मेदारी

टैगोर टाउन निवासी व्यवसायी के भाई की संक्रमण से मौत हो गई थी। उनकी ढाई साल की बेटी की देखभाल कर रहे हैं। 38 साल की उम्र में भाई की मौत की जानकारी देते हुए वह फफक पड़े। कहा कि इस महंगाई के दौर में भाई के परिवार को अकेलेे कैसे छोड़ सकता हूं। कहा कि सरकारी मदद के अलावा उनकी देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। सरकारी स्कूल में कोई बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहता है। इसलिए अगले सत्र में किसी अच्छे कान्वेंट में एडमिशन कराना है।

जानें क्‍या कहते हैं जिला प्रोबेशन अधिकारी

जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज कुमार मिश्र कहते हैं कि उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुभारम्भ किया है। इस योजना के तहत ऐसे बच्चों, जिनके माता या पिता या दोनों की मौत हुई है, को मदद पहुंचाई जा रही है।

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