विकासशील इंसान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बोले- निषाद समुदाय को दिया जाए अनुसूचित जाति का आरक्षण

वीआइपी के प्रदेश अध्‍यक्ष बोले कि प्रदेश में 16 प्रतिशत से अधिक आबादी होने के बाद भी निषाद समाज के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव हो रहा है। निषाद समाज को राजपाट दिलाने का झूठा सपना दिखाकर संजय निषाद अपने परिवार के हित साधने में लगे हैं।

Brijesh SrivastavaSun, 24 Oct 2021 07:44 AM (IST)
विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) के प्रदेश अध्‍यक्ष ने निषादों के आरक्षण का मसला उठाया है।

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) के प्रदेश अध्यक्ष चौ. लौटनराम निषाद  का कहना है कि वीआइपी पार्टी का एक मात्र लक्ष्य है कि निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिया जाए। इसके अतिरिक्त जातीय आधार पर भी गणना होनी चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब जानवरों की गणना हो सकती है। किन्नरों की गणना हो सकती है तो जातीय आधार पर गणना से क्यों गुरेज किया जा रहा है।

दोयम दर्जे का बर्ताव किया जा रहा : लौटनराम निषाद

पिछले दिनों प्रयागराज प्रवास के दौरान उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि प्रदेश में 16 प्रतिशत से अधिक आबादी होने के बाद भी निषाद समाज के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव हो रहा है। इसके लिए निजस्वार्थ प्रेरित नेता दोषी हैं। निषाद समाज को राजपाट दिलाने का झूठा सपना दिखाकर संजय निषाद अपने परिवार के हित साधने में लगे हैं। भोले भाले निषाद समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ अब नहीं होने दिया जाएगा। यह दावा ने किया।

परंपरागत पुश्तैनी पेशों की बहाली की जाए

वीआई के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मझवार, तुरैहा, गोंड, बेल्दार, खैरहा, खोरोट की तरह निषाद मछुआरा जातियों के आरक्षण व परंपरागत पुश्तैनी पेशों की बहाली की जानी चाहिए। निषाद कटपीस नहीं, थान वाली जातियों का समूह है। इस बिरादरी के लोग आने वाले विधानसभा चुनाव में जरूर दिखाएंगे। उत्तर प्रदेश की 403 में 169 सीटों पर 40 हजार से 1.20 लाख निषाद, कश्यप, बिंद मतदाता हैं। वीआइपी पूरे दमखम के साथ अपने चुनाव चिह्न नाव से मिशन-2022 का सफर तय करेगी। आवश्यकता पड़ी तो सामाजिक न्याय आधारित दलों से गठबंधन भी होगा।

पार्टी कार्यकर्ता सक्रियता बढ़ाएं

वीआइपी के प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर सक्रियता बढ़ाने का भी आह्वान किया। कहा, समाज के लोगों के बीच जाए और पार्टी की नीतियों को बताएं। यह भी स्पष्ट करें कि दूसरे दलों से समाज के लोग क्यों दूर रहें। प्रत्येक व्यक्ति को यह बताना होगा कि समाज के हित में जरूरी है कि चुनाव में पार्टी का हाथ मजबूत करें अन्यथा लोग यूं ही ठगते रहेंगे।

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