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प्रयागराज की सोमा तो अपने हिस्से की ऑक्सीजन तैयार करने की मुहिम में जुटी हैं, क्‍या आप भी ऐसा कर रहे

प्रयागराज की सोमा ने कोरोना संक्रमण काल में ऑक्‍सीजन की कमी को पूरा करने का मिशन शुरू किया है।

सोमा कहती हैं कि कई लोग ऑक्सीजन की कमी से जान गंवा बैठे हैं। प्रकृति अब भी हमें सबक दे रही है। हमें सचेत होना पड़ेगा। आधुनिकता के दौर में हम पर्यावरण को लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। यही वजह है कि शुद्ध हवा भी हमसे छिनती जा रही है।

Rajneesh MishraTue, 11 May 2021 04:36 PM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। वैश्विक महामारी कोरोना ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। इसकी दूसरी लहर ने ऑक्सीजन की कमी की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराया। यही वजह है कि लोग अब अपने आसपास हरियाली बढ़ाने में जुटे हैं। कम से कम अपने हिस्से की ऑक्सीजन खुद बनाना चाहते हैं। इसी प्रयास में लगी हैं प्रयागराज के मीरापुर मोहल्‍ले की सोमा मिश्रा। वह शिवचरण दास कन्हैयालाल इंटर कॉलेज में अंग्रेजी माध्यम की प्रभारी भी हैं।

पर्यावरण प्रदूषण से शुद्ध हवा भी हमसे छिनती जा रही है

सोमा इन दिनों अपने घर को गमलों में लगे पौधों से भरने में जुटी हैं। ये गमले सीढ़ी, छत, बरामदे यहां तक कि कमरों में भी अपनी जगह बना चुके हैं। पिछले दो महीने में करीब 400 पौधे गमलों में तैयार किए हैं। कहती हैं कि जाने कितने लोग ऑक्सीजन की कमी के कारण जान गंवा बैठे हैं। प्रकृति अब भी हमें सबक दे रही है। हमें सचेत होना पड़ेगा। आधुनिकता के दौर में हम पर्यावरण को लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। यही वजह है कि शुद्ध हवा भी हमसे छिनती जा रही है।

कोरोना संक्रमण काल में हरियाली बढ़ाने का सोमा ने किया प्रयास

उन्‍होंने कहा कि इस बंदी और महामारी के दौर में हरियाली को बढ़ाने का प्रयास किया है। नीबू, तुलसी, अजवाइन, मीठी नीम, एलोवेरा, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट, एरिका पाम जैसे तमाम तरह के पौधे लगाए हैं। अधिकांश पत्ती वाले पौधे हैं। बचपन में मां भी छतों पर गमलों में पौधे रखती थी पर तब सिर्फ इसकी सुंदरता दिखाई देती थी। अब हमारे आसपास ऑक्सीजन की कमी साफ दिख रही है। इससे इन पौधों की उपयोगिता भी बढ़ रही है। हर किसी को इसके लिए प्रयास करना होगा। जो घरों की रौनक तो बढ़ाएंगे ही आप के हिस्से की शुद्ध हवा भी देंगे। उन्‍होंने लेमन ग्रास, गिलोय, पुदीना जैसे पौधे भी गमलों में लगाए हैं। ये बंदी के दौरान समय व्यतीत करने व खुद को खुश और स्वस्थ रखने का भी माध्यम बन रहे हैं।

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