उप्र में पर्यटन का केंद्र बनेगा श्रृंगवेरपुरधाम : डा. नीलकंठ

उप्र में पर्यटन का केंद्र बनेगा श्रृंगवेरपुरधाम : डा. नीलकंठ

प्राचीनकाल में श्रृंगी ऋषि की तपस्थली व प्रभु श्रीराम-निषादराज की मिलन स्थली श्रृंगवेरपुर धाम का स्वरूप जल्द ही बदलेगा। यह धाम देश प्रदेश में पर्यटन का मेन केंद्र बनेगा। यह बातें उप्र के पर्यटन मंत्र डॉ नीलकंठ तिवारी ने श्रृंगवेरपुर धाम में रामायण मेला के शुभारंभ अवसर पर कहीं।

Publish Date:Thu, 26 Nov 2020 03:20 AM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, प्रयागराज : प्राचीनकाल में श्रृंगी ऋषि की तपस्थली व प्रभु श्रीराम-निषादराज की मिलन स्थली रहे श्रृंगवेरपुर धाम का स्वरूप जल्द भव्य होगा। यह धाम देश-प्रदेश में पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा। प्रदेश सरकार इसी दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। इसके मद्देनजर शासन ने श्रृंगवेरपुर में पांच एकड़ में 14 करोड़ 98 लाख रुपये से निषादराज पार्क निर्माण की स्वीकृति दे दी है। यह बातें प्रदेश के पर्यटन मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कही। श्रृंगवेरपुर में बुधवार को आयोजित 31वें राष्ट्रीय रामायण मेला के शुभारंभ समारोह में उन्होंने कहा कि अयोध्या और श्रृंगवेरपुर धाम भारतीय संस्कृति और समाज का प्रतीक हैं।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि श्रृंगवेरपुर की प्राचीनता को संरक्षित करते हुए पर्यटकों को आधुनिक सुविधा मुहैया कराने के लिए सरकार विकास का कार्य तेज करेगी। बोले, भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहा का राजा अपने देश की प्रजा को धर्म का पालन करने में पूरी छूट देता है। कहा कि हमारे देश में कट्टरपंथियों ने सैकड़ों साल शासन किया। इसके बावजूद भारतीय संस्कृति व धरोहर को खत्म नहीं कर पाए।

इसके पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने मेला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रृंगवेरपुर धाम में निषादराज पार्क बनाया जाना अच्छी बात है। लेकिन, ज्ञान को बढ़ावा देने वाले कार्य भी होने चाहिए। निषादराज ने पूरे भक्तिभाव से प्रभु श्रीराम को गंगापार कराया था। श्रृंगवेरपुर धाम में निषादराज के राज्य को पुन: कायम करने की आवश्यकता है। कहा कि प्रयागराज में श्रृंगवेरपुर धाम के विकास कार्यो को उस ऊंचाई पर ले जाने की जरूरत है। विधायक विक्रमाजीत मौर्य ने कहा कि श्रीराम वनगमन मार्ग अयोध्या से श्रृंगवेरपुर होते हुए चित्रकूट तक बनाया जाएगा। इसके लिए श्रृंगवेरपुर धाम से गंगापार करने के लिए एक पुल का निर्माण भी होगा। इस दौरान डा. बालकृष्ण पांडेय, अमित द्विवेदी, उमेशचंद्र द्विवेदी, काली सहाय त्रिपाठी आदि ने विचार व्यक्त किया।

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